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गाय को क्यों कहा जाता है माता… क्या आप जानते है इसकी वजह?

A woman worships a cow as Indian Hindus offer prayers to the River Ganges, holy to them during the Ganga Dussehra festival in Allahabad, India, Sunday, June 8, 2014. Allahabad on the confluence of rivers the Ganges and the Yamuna is one of Hinduismís holiest centers. (AP Photo/Rajesh Kumar Singh)

हमारे देश को बहुसंस्कृति वाला देश कहा जाता है। और हमारे देश में गाय को एक जानवर का नहीं एक माता का दर्जा दिया गया है। भारत में गाय को उसी तरह पूजा जाता है जैसे किसी देवी- देवता को पूजा जाता है।

जिसके पीछे की कई ऐसी वजह है, गाय दूध तो देती है सबको पता है पर गाय में मानवय भावनांए भी होती है ये हम में से बहुत ही कम लोगों को पता है। गाय आत्मा के विकास की प्रक्रिया में इंसान के सबसे करीब है।

विद्वानों के अनुसार कुछ पशु-पक्षी ऐसे हैं, जो आत्मा की विकास यात्रा के अंतिम पड़ाव पर होते हैं। उनमें से गाय भी एक है। इसके बाद उस आत्मा को मनुष्य योनि में आना ही होता है।
* कत्लखाने जा रही गाय को छुड़ाकर उसके पालन-पोषण की व्यवस्था करने पर मनुष्य को गौयज्ञ का फल मिलता है।

* भगवान शिव के प्रिय पत्र ‘बिल्वपत्र’ की उत्पत्ति गाय के गोबर में से ही हुई थी।

* ऋग्वेद ने गाय को अघन्या कहा है। यजुर्वेद कहता है कि गौ अनुपमेय है। अथर्ववेद में गाय को संपतियों का घर कहा गया है। 
* इस देश में लोगों की बोलियां खाने पीने के तरीके अलग हैं पर पृथ्वी की तरह ही सीधी साधी गाय भी बिना विरोध के मनुष्य को
सब देती है।
* पौराणिक मान्यताओं व श्रुतियों के अनुसार, गौएं साक्षात विष्णु रूप है, गौएं सर्व वेदमयी और वेद गौमय है। भगवान श्रीकृष्ण को सारा ज्ञानकोष गोचरण से ही प्राप्त हुआ। 
* भगवान राम के पूर्वज महाराजा दिलीप नन्दिनी गाय की पूजा करते थे। 
* गणेश भगवान का सिर कटने पर शिवजी कर एक गाय दान करने का दंड रखा गया था और वहीं पार्वती को देनी पड़ी। 

* भगवान भोलेनाथ का वाहन नन्दी दक्षिण भारत की आंगोल नस्ल का सांड था। जैन आदि तीर्थकर भगवान ऋषभदेव का चिह्न बैल था।

* गरुढ़ पुराण अनुसार वैतरणी पार करने के लिए गोदान का महत्व बताया गया है।
* श्राद्ध कर्म में भी गाय के दूध की खीर का प्रयोग किया जाता है क्योंकि इसी खीर से पितरों की ज्यादा से ज्यादा तृप्ति होती है। 
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