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दिल्ली सरकार और MCD में क्यों रहता है तनाव? आखिर कब होगा इसका समाधान और राजधानी बनेगी शानदार

सौ.गूगल

साल 2017 तारीख 26 अप्रैल, इसी दिन दिल्ली MCD के 2017 चुनावों का रिज़ल्ट आया और एमसीडी में झाडू और हाथ ने एक दूसरे को साफ कर दिया, और जीत कमल खिलने के साथ हुई. यानी दिल्ली MCD  में लगातार तीसरी बार कमल खिला और बीजेपी की जीत हुई.

 

आखिर क्यों दिल्ली सरकार  और MCD के बीच तनाव रहता है?

दरअसल सारा खेल सियासत का है. जहां एक दल दूसरे दल के साथ काम नहीं करना चाहता. आप सरकार कहती है कि हम तो साथ में काम करना चाहते हैं वहीं बीजेपी और कांग्रेस के मुताबिक ये केजरीवाल सरकार साथ काम नहीं करना चाहती. ऐसे में नुकसान सिर्फ दिल्ली की जनता का होता है. दिल्ली सरकार जब सत्ता में आई थी तो भ्रष्टाचार दिल्ली करने का वादा किया. लेकिन दिल्ली सरकार 100 फीसदी भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगा पाई. वहीं दूसरी ओर दिल्ली MCD पर भ्रष्टाचार के कई संगीन आरोप हैं. 

 

2017 MCD चुनाव

चुनाव में तीनों निगमों की कुल 272 सीटों में से 184 सीटों पर भाजपा का ने जीत दर्ज की. जबकि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को 46 सीटें ही नसीब हुई, वहीं कांग्रेस सिर्फ 30 सीट ही सुरक्षित कर पाई.

बहरहाल ये तो बात रही चुनावी गणित की जो समझना जरूरी है. वहीं इन चुनावों के बाद एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि क्या दिल्ली की “आप” सरकार और एमसीडी में “भाजपा” सरकार के बीच तालमेल कैसे बैठेगा.

इस सवाल का जवाब भी हमें जल्दी ही मिल गया. क्योंकि राजधानी में कूड़े का अंबार लग गया. इसके लिए MCD ने आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया तो वहीं आम आदमी का कहना था कि साफ सफाई का जिम्मा दिल्ली सरकार का नहीं एमसीडी के पास है.

बहरहाल इस बात पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार व एमसीडी को फटकार भी लगाई . गौरतलब है कि साफ-सफाई का जिम्मा एमसीडी के पास है लेकिन एमसीडी ने दिल्ली सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया.

 

चलिए अब आपको बताते हैं कि आखिर दिल्ली सरकार और MCD के अंतर्गत कौनसे विभाग आते हैं, और कौन सी पार्टी अपना दायित्व ठीक से नहीं निभा रही.

 

MCD

-तीन अलग निगमों और 12 ज़ोन में बटी दिल्ली MCD में 1 लाख 60 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं.

-150 करोड़ से ज्यादा के बजट वाली दिल्ली एमसीडी का मुख्य काम राजधानी की सफाई और कूड़े का निपटान करना है.

-इसके साथ ही प्राथमिक सरकारी शिक्षा की जिम्मेदारी भी एमसीडी की है.

-6 बड़े हॉस्पिटल, लगभग 150 प्रसूति केंद्र और 100 डिस्पेंसरी भी एमसीडी चलाती है.

-200 से ज्यादा सामुदायिक भवन एमसीडी के अंदर आते हैं.

-पार्क से लेकर पार्किंग बनाने से लेकर जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र तक एमसीडी जारी करती है.

-घरों के नक्शे भी एमसीडी ही पास करती है.

-शमशान घाटों का रखरखाव, हेल्थ ट्रेड लाइसेंस, जेनरल ट्रेड लाइसेंस, फैक्ट्री लाइसेंस जारी करना आदि.

-गलियों की सड़क भी एमसीडी बनाती है.

-MCD की आय का सबसे बड़ा जरिया प्रॉपर्टी टैक्स है. इसके अलावा विज्ञापन, पार्किंग आदि से एमसीडी की कमाई होती है. दिल्ली सरकार भी एमसीडी को करों में से उसका हिस्सा, अनुदान और कर्ज देती है.

 

दिल्ली सरकार का पक्ष

दिल्ली सरकार के अंतर्गत के आने वाले विभागों में बिजली, पानी, स्वास्थ्य जैसे बड़े विभाग और शिक्षा जैसे अहम डिपार्टमेंट भी आते हैं. वहीं दिल्ली सरकार की माने तो उनका कहना है कि दिल्ली के स्कूल आज किसी प्राईवेट स्कूल से कम नहीं लगते, वहीं स्वास्थ्य पर सरकार मोहल्ला क्लिनिक पर अपनी पीठ थपथपाती है. 

आखिर क्यों?

बहरहाल दिल्ली में सत्ता आम आदमी पार्टी के पास है तो केंद्र और MCD में बीजेपी के पास ऐसे में टकराव होना लाजमी है. जिसका सीधा असर दिल्ली की जनता और राजधानी की सुंदरता पर पड़ता है. अगर इसकी झलक याद करनी है तो पिछले साल का वो वाक्या याद कर लें जब दिल्ली कूड़ेदान बन गई थी

 

 

 

 

 

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