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छींकने के बाद ‘SORRY’ क्यों बोलते हैं लोग? फिर सामने वाला कहता है… ‘God bless you’

जब कोई तत्व हमारी नाक के ज़रिए शरीर में जाता है तो अक्सर छींक आती है. छींक आना एक क्रिया है जो पूरी तरह से प्राकृतिक है. इसके अलावा छींक आने का कारण सर्दी-जुकाम या फिर किसी तरह की एलर्जी भी हो सकती है… आईये और अच्छे से समझाते हैं

‘जब भी नाक में कोई बाहरी कण घुस जाता है जिससे नाक की झिल्ली में खुजली या सूजन आने लगे, तो नाक से ये सन्देश हमारे मस्तिष्क तक जाता है और मस्तिष्क ही उन कणों को बाहर निकालने का आदेश शरीर की मांसपेशियों को देता है, और छींक के ज़रिये ऐसे हानिकारक कणों को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है’.

छींक आने की वजह तो आपको मालूम हो गई, अब अपनी जानकारी के मुख्य हिस्से पर आते हैं. ये चलन बढ़ता जा रहा है कि कोई शख्स छींक मारे फिर सामने से ‘सॉरी’ कहने लगे, ऐसा क्यों? ये तो सामान्य सी बात है जो सबको आती है. ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार लोगों के बीच रहते हुये आप छींकने में असहज महसूस करते हैं और छींक के बाद ‘सॉरी’ बोलने लगते हैं. इतना ही नहीं इस सॉरी के जवाब में आपके आस-पास मौजूद लोग भी It’s ok या God bless you बोलकर इस छींक के किस्से को खत्म करते हैं.

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इस चलन का कारण है…बदलता समाज, क्योंकि हमारे छींकने से आस पास के लोग असहज हो सकते हैं. यही वजह है कि हम छींकने के बाद ‘सॉरी’ या फिर ‘एक्सक्यूज मी’ कहते हैं. इतना ही नहीं दूसरों के देख कर भी छींक के बाद ‘सॉरी’ या फिर ‘एक्सक्यूज मी’ कहने का चलन बढ़ रहा है.

न रोकें छींक…

बहरहाल छींक के बाद सॉरी बोलिए या फिर एक्सक्यूज मी, वो आप पर निर्भर करता है लेकिन कभी भी अपनी छींक को मत रोकिए, ऐसा करना आपके स्वास्थ्य के लिए कतई भी ठीक नहीं. क्योंकि…

  1. छींक को रोकने से तेज़ दबाव के साथ नाक से हवा बाहर आने की बजाये दूसरे अंगों की ओर मुड़ जाती है जिससे सबसे ज्यादा नुकसान कान के परदे को हो सकता है.
  2. इसके अलावा छींक रोकने से शरीर से बाहर निकलने वाले बैक्टीरिया भी शरीर में ही रह जाते हैं जो सेहत को हानि पहुंचा सकते हैं.
  3. जब छींक आने में शरीर के कई अंग भाग लेते हैं तो छींक रुकने पर भी तो कई अंग प्रभावित होंगे ना. इसका प्रभाव आँखों पर भी पड़ता है और गर्दन में मोच भी आ सकती है.
  4. बार बार ऐसा करने से दिल का दौरा और दिमाग को क्षति जैसे भारी नुकसान भी उठाने पड़ सकते है.

अंत में इतना ही, अगर आप अकेले हैं या फिर लोगों के बीच कभी भी अपनी छींक को बस इस वजह से न रोकें कि दूसरे क्या सोचेंगे. क्योंकि दूसरों का तो काम ही सोचना.

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