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#Metoo कैम्पेन के बाद हर किसी को विशाखा गाइडलाइन्स की जानकारी होनी चाहिए….

सोशल मीडिया पर #metoo कैम्पेन के जोर पकड़ने के बाद बॉलिवुड से लेकर मीडिया में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि इस कैम्पेन जरिए रोज़ नए नए लोगों के नाम इसमें जुड़ रहे हैं. फिल्मी दुनिया हो या फिर दफ्तर हर जगह महिलाओं के साथ छेड़छाड़ होती है, और बीते कुछ दिनों में जिस तरह से मीडिया जगत के लोगों पर ये आरोप लगे हैं उससे ये मामला हर किसी की ज़ुबान है. अब ऐसे में इन हरकतों के खिलाफ मुल्क में मौजूद सख्त कानूनों पर गौर करना ज़रूरी है. आपको बता दें कि दफ्तरों से लेकर फिल्म के सेट तक महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर नकेल कसने के लिए अलग से एक कानून है जिसे  ‘विशाखा गाइडलाइन्स'(Vishaka Guidelines)  के नाम से जाना जाता है. ‘विशाखा गाइडलाइन्स’ के तहत महिलाएं तुरंत शिकायत दर्ज करवा सकती हैं.

क्या हैं विशाखा गाइडलाइन

  1. हर ऐसी कंपनी या संस्थान के हर उस कार्यालय (मुख्यालय या शाखा) में, जहां 10 या उससे ज़्यादा कर्मचारी हैं, एक अंदरूनी शिकायत समिति (इन्टर्नल कम्प्लेन्ट्स कमेटी या ICC) की स्थापना करना अनिवार्य होता है.
  2. ICC की अध्यक्ष महिला ही होगी और कमेटी में अधिकांश महिलाओं को रखना भी ज़रूरी होता है. इस कमेटी में यौन शोषण के मुद्दे पर ही काम कर रही किसी बाहरी गैर-सरकारी संस्था (NGO) की एक प्रतिनिधि को भी शामिल करना ज़रूरी होता है.
  3. कंपनी या संस्थान में काम करने वाली महिलाएं किसी भी तरह की यौन हिंसा की शिकायत ICC से कर सकती हैं. यह कंपनी अथवा संस्थान का उत्तरदायित्व होगा कि शिकायतकर्ता महिला पर किसी भी तरह का हमला न हो, या उस पर कोई दबाव न डाला जाए.
  4. कमेटी को एक साल में उसके पास आई शिकायतों और की गई कार्रवाई का लेखा जोखा सरकार को रिपोर्ट के रूप में भेजना होगा. अगर कमेटी किसी को दोषी पाती है, तो उसके खिलाफ IPC की संबंधित धाराओं के अलावा अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जानी होगी.

सजा हो सकती है

सज़ा संगठन के नियमों के अनुसार तुरंत हो सकती है लेकिन अगर संगठन में नियम नहीं हैं तो अनुशंसात्मक कार्रवाई जिसमें लिखित माफी, चेतावनी, पदोन्नति रोकना, वेतन वृद्धि या वृद्धि को रोकना, नौकरी से निकाले जाना शामिल है. इसके अलावा यौन या मानसिक उत्पीड़न के केस में कानूनी कार्यवाई भी होगी.

साल 1992 में हुए राजस्थान के चर्चित भवंरी देवी गैंगरेप केस से इसकी शुरुवात हुई. इस केस के बाद महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों के लिए आवाज उठाने वाली संस्था विशाखा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी. भवंरी देवी राजस्थान सरकार के एक कल्याणकारी योजना में कार्यरत थी. उन्होंने जब राजस्थान में बाल विवाह का विरोध किया तो कई लोगों ने उनके साथ रेप किया. सुप्रीम कोर्ट ने इस केस के मद्देनजर 1997 में जनहित याचिका के जवाब में कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश (विशाखा गाइडलाइन्स) दिये और सरकार से कहा है वह जरूरी कानून बनाए. इसके बाद दफ्तरों में होने वाले शोषण की और लोगों का ध्यान गया.

‘विशाखा गाइडलाइन्स’ (Vishaka Guidelines)  के तहत किसी को भी गलत तरीके से छूना या छूने की कोशिश करना, गलत तरीके से देखना या घूरना, यौन संबंध स्थापित करने के लिए कहना या इससे मिलती-जुलती टिप्पणी करना, यौन इशारे करना, महिलाओं को अश्लील चुटकुले सुनाना या भेजना, महिलाओं को पोर्न फिल्में या क्लिप दिखाना – सभी यौन उत्पीड़न के दायरे में आता है.

विशाखा गाइडलाइन्स से पहले महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन हिंसा और अन्य  हिंसा जैसे अपराधों से निपटने के लिए काफी पुराना कानून था जो 1860 में लागू हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर 19 अक्टूबर 2012 को एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते संस्थाओं से कहा था कि वह यौन हिंसा से निपटने के दफ्तर में समितियों का गठन करे. उसके बाद केंद्र सरकार ने अप्रैल 2013 में ‘सेक्शुअल हैरैसमेंट ऑफ विमिन ऐट वर्क-प्लेस ऐक्ट’ को मंजूरी दे दी.

#METOO

हालिया दिनों में जिन दिग्गज लोगों पर उत्पीड़न के आरोप लगे हैं, उन्में गायक कैलाश खेर, लेखर चेतन भगत, नॉवलिस्ट किरन नागरकर, एक्टर रजत कपूर, नाना पाटेकर, विकास बहल, कॉमेडियन उत्सव चक्रवर्ती, एक्टर आलोकनाथ, विदेश राज्य मंत्री और पूर्व में संपादक रहे एमजे अकबर और गायक अभिजीत का नाम शामिल है.

 

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