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आखिर क्यों बोला जाता है गणपति बाप्पा मोरया ? क्या आप जानते हैं ‘मोरया’ का अर्थ?

13 सितम्बर से देश भर में गणेश पूजा की शुरआत हो गयी और धूमधाम से ये त्यौहार अगले दस दिनों तक मनाया जाएगा। गणपति भगवान की पूजा के दौरान अकसर हम गणपति बाप्पा मोरया ,मंगलमूर्ति मोरया के नारे लगाते हैं और खासकर महाराष्ट्र में ये बहुत ज्यादा बोला जाता है। लेकिन क्या आप वाकई जानते हैं की भगवान गणेश के नाम के साथ लगे शब्द मोरया का आखिर मतलब क्या है? नहीं ? तो आज इस पोस्ट में जानिए की ये नाम आखिर क्यों लगा हैं गणेश जी के नाम के साथ।

Ganpati at Morya Mandir

इसके पीछे छिपा है गणेश जी के एक भक्त की कथा। महाराष्ट्र के पुणे शहर से तक़रीबन 21 किलोमीटर दूर स्थित है चिंचवाड़ नाम का एक गांव। कहा जाता है की पन्द्रवीं शताब्दी के दौरान इस जगह एक संत महात्मा हुआ करते थे जिनका नाम था मोरया गोसावी। ये भगवान गणेश के अत्यंत निष्ठावान भक्त थे। कहानी है एक भक्‍त और भगवान की, जहां भक्‍त की भक्ति और आस्था के कारण भक्त के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया भगवान का नाम । प्रत्येक वर्ष मोरया जी गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य पर गांव चिंचवाड़ से मोरगांव तक पैदल यात्रा कर गणेश जी की पूजा अर्चना करने के लिए जाया करते थे। ऐसा वो कई सालों तक करते रहे। पौराणिक कथाओं में ऐसा कहा जाता है की एक दिन स्वयं भगवन गणपति मोरया जी के स्वप्न में दर्शन देने पहुंचे और कहा की गणेश जी की मूर्ति मोरया को नदी में मिलेगी और बिलकुल ऐसा ही हुआ। नदी में मोरया जी को स्नान करने के दौरान मूर्ति मिली। तब से लोगों ने यही मान लिया की भगवान गणपति का अगर कोई सच्चा भक्त है तो वो मोरया गोसावी जी ही हैं। इस घटना के उपरान्त से ही संत मोरया जी के दर्शन करने के लिए लोग दूर दूर से पहुंचने लगे।

Sant Morya Gosaavi

कहा जाता है की जब भी कोई भक्त मोरया जी के चरण स्पर्श कर मोरया कहता तो वे भक्तों से मंगलमूर्ति कहते थे। उस वक़्त से ये सिलसिला चलता रहा जो आज हर भक्त भगवान गणेश जी की पूजा में गणपति बाप्पा मोरया ,मंगलमूर्ति मोरया उच्चारण करता है। ऐसी मान्यता है की भगवन एकदन्त के आशीष से ही संत मोरया का जन्म हुआ था और अपने माता पिता की तरह ही मोरया भी बचपन से भगवान गणेश की पूजा करते आये थे। भक्तों का कहना है कि गणपति बप्पा ने मोरया गोसावी को वरदान दिया था कि अनंत काल तक मोरया का नाम गणपति के साथ जुड़ा रहेगा और शायद एक कारण ये भी है कि लोग गणपति के साथ मोरया का नाम भी जोड़कर जयकारा लगाते हैं।

Chinchwaar ka Morya Mandir

चिंचवाड़ गांव स्थित संत मोरया के मंदिर में हर साल दो बार विशेष उत्सव का आयोजन किया जाता है। गणपति भक्त ये मानते हैं की मोरया गोसावी मंदिर में आने से भगवान गणेश की विशेष कृपा मिलती है। इस मंदिर में बाप्पा का एक अद्भुत रूप देखने को मिलता है साथ ही गणपति के भक्त गोसावी के साथ साथ उनके आठ वंशजों की समाधि भी यही है। इस मंदिर में आने वाले हर भक्त की मनोकामना ज़रूर पूरी होती है। मयूरेश्वर मंदिर में एक पेड़ है जिसके नीचे मोरया गोसावी की एक मूर्ति है जिसके पीछे भी एक अनोखी कहानी बताई जाती है। ऐसा कहा जाता है की एक बार चिंचवाड़ गांव से मोरया गोसावी पैदल जा रहे थे लेकिन बाढ़ की वजह रास्ता बंद था तौर तब इसी पेड़ के नीचे बैठकर मोरया गोसावी ने मयूरेश्वर गणपति को याद किया । वैसे भक्त जितना विश्वास मयूरेश्वर गणपति में करते हैं उतनी ही श्रद्धा संत मोरया गोसावी में भी करते हैं। भक्त मोरया गोसावी को मयूरेश्वर गणपति का ही अवतार भी मानते हैं।

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