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REPORT: मानव जाति के लिए ख़तरा न बन जाए! आने वाला ROBO ज़माना

जो मनुष्य अपने विकास और मानव जाति के उत्थान के लिए ज़रूरी मशीनें बना रहा है वो आने वाले समय में क्या इंसानों के लिए ही परेशानी पैदा करेंगी? ये ज़रूरी और बड़ा सवाल है. दिन-प्रतिदिन इंसानी दिमाग TECHNOLOGY की रेस में बेहतर… और बेहतर होता जा रहा है. मसलन एक मोबाइल जनरेशन से दूसरी मोबाइल जनरेशन में अपग्रेड होना. पहले सारा काम इंसान किया करते थे, फिर समय बदला नए-नए उपरकणों का अविष्कार होना शुरु हुआ. पहले बड़ा टीवी जो ज्यादा जगह घेरता था लेकिन अब वही टीवी पतला हो गया है जो जगह घेरता ही नहीं. ऐसे ही कई तरह की मशीनें जो पहले साइज में बढ़ी होती थीं वो अब छोटी और तेज होती जा रही हैं. ये सब विकसित होते मानव समाज की ही तस्वीरें हैं.

हर सिक्के के जैसे दो पहलू होते हैं वैसे ही हर TECHNOLOGY की अच्छाई बुराई भी होती है. पिछले साल जब ‘सोफिया’ नाम की रोबोट को सऊदी अरब ने अपने देश की नागरिकता प्रदान की थी तब जानकारों ने इसे ऐतिहासिक बताया था. कोई शक नहीं कि एक रोबोट को किसी देश की नागरिकता देना कोई आम बात हो. सिटिजनशिप पाने वाली रोबोट सोफिया दुनिया की पहली रोबोट नागरिक है. इस रोबोट के कई फायदे हैं जो आधुनिकता को एक दूसरे लेवल पर ले जाता है. खैर, मुद्दे पर आते हैं. आने वाले दिनों में बढ़ते रोबो ज़माने का प्रभाव किस तरह इंसानों पर असर डालेगा? इसका जवाब विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के एक अध्ययन से पता चलता है.

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डब्ल्यूईएफ (WEF) के अनुसार वर्ष 2025 तक रोबोट मौजूदा कार्यभारों का 52 प्रतिशत कार्य संभालने लगेंगे, जो अब की तुलना में करीब दुगुना होगा. इसका मतलब ये है कि इंसानों का काम रोबोट करेंगे मतलब मशीनें इंसानों का काम खा जाएंगी. डब्ल्यूईएफ ने सोमवार को यह अध्ययन जारी किया. मंच का अनुमान है कि मानवों के लिये ‘‘नयी भूमिकाओं’’ में तेजी से इजाफा देखा सकता है. आज के तकनीकी युग में रोबोट्स इंसानों की तरह ही हर कार्य में बढ़-चढ़ कर अपनी भूमिका निभा रहे है. गौर करने वाली बात है कि स्विस संगठन ने एक बयान में कहा, ‘‘आज मशीनों के माध्यम से जहां 29 प्रतिशत कार्य हो रहे हैं वहीं वर्ष 2025 तक मौजूदा कार्यभारों का तकरीबन आधा मशीनों के माध्यम से सम्पन्न होगा.’’

लोगों को JOBLESS करेगा ROBO ज़माना?

ये अध्ययन कहता है कि ई-कॉमर्स एवं सोशल मीडिया सहित सेल्स, मार्केटिंग और कस्टमर सर्विस जैसी जिन नौकरियों में ‘‘मानव कौशल’’ की आवश्यकता होती है उनमें मानव कौशल में इजाफा देखा जा सकता है. इसी तरह से रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और प्रबोधन जैसे कार्यों में भी मानव कौशल बना रहेगा. हालांकि जैसा उपर कहा गया है कि हर चीज की अच्छाई बुराई दोनों होती हैं वैसे ही रोबो का होना इंसानों के लिए अच्छा है. ये न सिर्फ आधुनिक समाज को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा बल्कि लोगों का काम भी आसान, और फास्ट बनाएगा. हालांकि एक बात सोचने लायक है कि जैसे-जैसे दुनिया की जनसंख्या बढ़ती जा रही है ऐसे में बढ़ती TECHNOLOGY मानवता का विकास करेगी. लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि बढ़ता रोबो ज़माना लोगों की नौकरी खाने की क्षमता रखेगा.

2016 में भी छपी थी रिपोर्ट

जानकारी हो कि साल 2016 में वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम (डब्लूईएफ) द्वारा ही छपी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि अगले पांच साल में रोबोट दुनिया भर में 50 लाख से ज्यादा नौकरियों पर अपना कब्जा जमा लेंगे. इस दौरान रिटेल स्टोर, फैक्ट्रियों, रेलवे स्टेशनों और होटलों में रोबोट का चलन काफी आम हो जाएगा. इतना ही नहीं रिपोर्ट में कहा गया कि 2020 तक दुनिया भर में 20 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी, लेकिन 70 लाख से ज्यादा लोग अपनी नौकरी स्वचालन (ऑटोमेशन) के कारण खो देंगे. और साल 2020 तक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलोजी चौथी औद्योगिक क्रांति के तहत इंसानों से करीब 50 लाख नौकरियां छीन लेगी. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इस चौथी औद्योगिक क्रांति में मोबाइल इन्टरनेट और स्मार्ट फोन ऐप भी बड़ी संख्या में नौकरियों पर असर डालेंगे.

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