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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर दर्ज हैं IPC की इतनी सारी धाराएं

5 जून 1972 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश और आज के उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचुर गाँव में एक गढ़वाली राजपूत परिवार में अजय सिंह बिष्ट का जन्म हुआ था. लेकिन आज अजय सिंह बिष्ट योगी आदित्यनाथ बन चुके हैं और उत्तर प्रदेश के 21वें मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने 19 मार्च 2017 को यूपी के सीएम के तौर पर शपथ ली थी. योगी आदित्यनाथ की पहचान गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मन्दिर के महन्त के रूप में ज्यादा है जहां से उनका सियासी सफर शुरु होता है.

आदित्यनाथ गोरखनाथ मन्दिर के पूर्व महन्त अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी हैं. इतना ही नहीं  हिन्दू युवाओं के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूह हिन्दू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं. 1998 से 2017 तक भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और 2014 लोकसभा चुनाव में भी यहीं से सांसद चुने गए थे. ये वो जानकारी है जो WIKIPEDIA देता है, इसके विपरीत भी ऐसी कई बातें हैं जो लोगों को पता नहीं हैं.

सौ. गूगल

जगजाहिर जानकारी

एक कट्टर हिंदूवादी नेता की पहचान रखने वाले योगी आदित्यनाथ पर कई मामले दर्ज हैं. बहुत कम बार ऐसा होता है कि संवैधानिक पद पर मौजूद किसी व्यक्ति पर इतने केस दर्ज हो, लेकिन राजनीति सबसे विपरीत है यहां नेताओं पर दर्ज केस की भरमार है. योगी आदित्यनाथ ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव का पर्चा भरते समय जमा किए हलफ़नामे में चार आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी. एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स ने अपनी रिपोर्ट में योगी पर तीन गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी दी है.

योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गोरखपुर और महाराजगंज में लगभग एक दर्जन मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या के प्रयास जैसे संगीन मामले भी शामिल हैं.

1999- इस साल योगी आदित्यनाथ पर महाराजगंज में कई केस दर्ज हुए. मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ पहला मामला साल 1999 में पंचरुखिया कांड में महराजगंज कोतवाली में दर्ज किया गया था. यहां पर क़ब्रिस्तान और तालाब की ज़मीन को लेकर हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच विवाद था. साल 1999 में इसी तरह के और कई मामले योगी पर दर्ज हुए जिनमें उन पर इन धाराओं को लगाया गया…

-धारा 147 (दंगे के लिए दंड)

-148 (घातक हथियार से दंगे)

 -295 (किसी समुदाय के पूजा स्थल का अपमान करना)

-297 (कब्रिस्तानों पर अतिक्रमण)

-153A (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना)

 -307 (हत्या का प्रयास) और 506 (आपराधिक धमकी के लिए दंड)

-302 (मौत की सजा)

-504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान)

-147 (दंगे के लिए दंड) दो आरोप दर्ज

-149, 307, 336 (दूसरों के जीवन को खतरे में डालना)

आपको बता दें कि इस साल योगी आदित्यनाथ पर दर्ज हुए मामलों में पुलिस ने 2000 में ही क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी, लेकिन फैसला आना बाकी है.

2006- गोरखपुर में दर्ज हुए योगी आदित्यनाथ पर मामले

आईपीसी की धारा 147, 148, 133A (उपद्रव को हटाने के लिए सशर्त आदेश)

-285 (आग या दहनशील पदार्थ के संबंध में लापरवाही)

-297 (कब्रिस्तानों पर अतिक्रमण)

यहां भी पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी, लेकिन फैसला अभी नहीं आया.

2007- 27 जनवरी 2007 को योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में सांप्रदायिक दंगा हुआ था. इस दंगे में दो लोगों की मौत और कई लोग घायल हुए थे. इस दंगे के लिए तत्कालीन सांसद व मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ, तत्कालीन विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल और गोरखपुर की तत्कालीन मेयर अंजू चौधरी पर भड़काऊ भाषण देने और दंगा भड़काने का आरोप लगा था. आरोप था कि इनके भड़काऊ भाषण के बाद ही दंगा भड़का. इस दौरान योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी भी हुई थी.

इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2018 में योगी आदित्यनाथ और अन्य बीजेपी नेताओं को राहत देते हुए केस खारिज कर दिया था. आपको बता दें कि इस मामले में ताजा अपडेट ये है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के योगी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में फिर से सुनवाई होगी. इससे पहले एससी ने सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा है कि योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भड़काऊ भाषण के आरोप में केस क्यों न चलाया जाए?

इस केस में उन पर IPC की 151A, 146, 147, 279, 506 धाराएं दर्ज हैं.

बहरहाल आपको बता दें कि यूपी में सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यना‌थ सहित कई अन्य नेताओं पर दर्ज मुकदमें वापस लेने का फैसला किया गया है. बाकायदा इस संबंध में प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आदेश भी जारी किया था.

मौजूदा वक्त की बात की जाए तो योगी आदित्यनाथ अपनी उस टिप्पणी के कारण सुर्खियों में जिसमें वह गन्ना किसानों से गन्ने के बजाए कुछ और फसल उगाने की बात कर रहे हैं. योगी ने कहा, ‘अन्य फसलें भी बोइए, दिल्ली का बाजार पास है.  वैसे भी लोग शुगर के कारण बीमार होते जा रहे हैं’. आपको बता दें कि सत्ता संभालते वक्त सीएम योगी ने गन्ना किसानों के भुगतान के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था.  

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