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गाजियाबद में खुलने जा रहा है देश का पहला राजनीति का स्कूल, अब नेताओं की भी लगेगी क्लास

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कैबिनेट मीटिंग के बाद उस ट्रेनिंग सेंटर को खोलने पर मुहर लगा दी है जिसमें राजनेताओं को पॉलिटिकल ट्रेनिंग यानी राजनीति करना सीखाई जाएगी. यानी जैसे, बच्चों को पढ़ाया जाता है, खिलाड़ियों को सिखाया जाता है वैसे ही अब नेताओं को भी अच्छा नेता बनने की ट्रेनिंग दी जाएगी.

सबसे पहले इस ट्रेनिंग सेंटर की बात करते हैं, यूपी सरकार इस ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट को दिल्ली से सटे गाजियाबद में खोलने जा रही है. ये देश का पहला पॉलिटिकल ट्रेनिंग देने वाला केंद्र होगा जिसके लिए करीब 51,213 वर्गमीटर भूमि चिन्हित कर ली गई है. योगी सरकार ने इस ट्रेनिंग स्कूल के लिए 168 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट रखा है.

डिप्लोमा और डिग्री कोर्स होगा शुरू

इसमें इंटर्न को भी पढऩे का मौका मिलेगा. दरअसल, इस तरह के कोर्स का सूबे के विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और संस्थाओं में अभाव है. इंस्टीट्यूट बनने पर यहां पढऩे वाले स्टूडेंट्स के साथ एक्सपट्र्स राजनीति के हर पहलू के बारे में अपने अनुभव शेयर करने आएंगे. इसकी मान्यता और कोर्स के लिए देश-विदेश की नामचीन यूनिवर्सिटीज से संपर्क साधा जा रहा है जो यहां पढऩे वालों को डिप्लोमा और डिग्री प्रदान करेंगे.

उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने दावा किया है अगले 2 साल में नेताओं का यह ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट बनकर तैयार हो जाएगा.  योगी सरकार के प्रवक्ता और बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि नेताओं का यह राजनैतिक स्कूल अपने आप में पहला और अनोखा है, जहां नए लोग राजनीति का ककहरा सीखेंगे तो पुराने लोग अपनी राजनीति को और भी धार दे सकेंगे.

क्या ज़रूरत आन पड़ी?

जानकारी हो कि आज भारत में युवा ज्यादा हैं, ऐसे में युवा नेताओं का प्रभाव भी बढ़ता जा रहा है. पहले की तुलना में राजनीति में आने वाले नेताओं की औसत आयु घटती जा रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश विधान परिषद में जहां पहले सिर्फ वरिष्ठ नेता नजर आते थे अब वहां ज्यादातर सदस्य 35 साल के हैं. पहले जहां नेता चुनाव में सालों की मेहनत और राजनीतिक अनुभव के बाद आते थे वहीं अब सीधे विधायक और सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं.

पहले नेता जहां जमीन से जुड़े रह कर, लोगों के बीच संघर्ष कर और राजनीति में तप कर अपना अस्तित्व स्थापित करते  थे. अब के नेता लॉन्च होते हैं. लकदक कपड़े, स्टाइलिश जीवनशैली और तामझाम के साथ यह अपनी हवा बनाते हैं. नतीजा यह हुआ है कि इन नेताओं के पास चमक दमक तो है लेकिन जानकारी और अनुभव का नितांत अभाव. ना तो ये संसदीय परंपराओं को जानते हैं ना ही नियम कानूनों को.

नेता का मतलब सिर्फ चुनाव जीतना ही नहीं है. बहुत से विधायक और सांसद भी अपने अधिकारों और कर्तव्यों से अनजान हैं. सदन में कौन सी बात कैसे रखनी है. किस नियम के तहत काम रोको प्रस्ताव आ सकता है, किस नियम के तहत सूचना देनी है, व्यवस्था का प्रश्न उठाना है इन सब से बहुत से विधायक और कुछ सांसद भी अनजान हैं. यह सब बातें ट्रेनिंग में सिखाई और बताई जाएंगी. समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार में चुने गए विधायकों के लिए प्रबोधन का कार्यक्रम रखा गया था लेकिन वो सिर्फ कुछ ही दिनों के लिए था. यह स्कूल पूरी ट्रेनिंग देगा.

 

 

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