Latest Sports World

हरियाणा के इस छोरे ने 15 साल की उम्र में निशानेबाजी में जीता गोल्ड

कुछ करने का जज्बा हो तो जिंदगी मे कुछ भी नामुमकिन नहीं होता, ऐसा ही कुछ निशानेबाज अनीश के साथ हुआ। अनीश का जज्बा और मेहनत कॉमनवेल्थ गेम्स  मे रंग लेकर आई। अनीश अकेले ही दीवार पर निशाने लगाते रहता था, ना कोई कोच था ना कोई गलती बताने वाला फिर भी इस खेल की और बढ़ना था। बड़ी बहन ने भाई का हौसला बढ़ाने का निर्णय लिया और खुद भी निशानेबाज बन गई। धीरे-धीरे दोनों ही एक दूसरे की गलतियां निकालने लगे, दोनों एक दूसरे के कोच बन गए। नेट का सहारा लेते, नामी गिरामी खिलाड़ियों के मोबाइल नंबर ट्रेस कर तकनीकी जानकारी भी लेने लगे।

धीरे-धीरे अनीश की अपनी पहचान बने लगी और राज्य से लेकर राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में शिरकत करने लगे। पहले हार, फिर कांस्य पदक और सिल्वर से गोल्ड मेडल जीतने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

अनीश ने महज 15 साल की उम्र में ये उपलब्धि हासिल की है।  कॉमनवेल्थ गेम्स में अनीश ने 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीता है। वे सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले भारतीय एथलीट बन गए हैं।

 

फौजी की इस बात ने अनीस को बनाया स्टार, बहन बनी कोच और जीत लिया गोल्ड मेडल

यहां से आया निशानेबाजी खेलने का जज्बा….

10साल की उम्र में अनीश अपने परिवार के साथ पूना आर्मी कैंप में घूमने गया था। अनीश के निशाना लगाने की बारी आई तो एक फौजी ने कहा कि बंदूक चलाना बच्चों का खेल नहीं है। वही बात अनीस को चुभ गई। कैंप से बाहर आते ही जिद कर पूना की मार्केट से खिलौना पिस्तौल खरीदी। इसके बाद घर में दीवारों पर निशान लगाने लगा। इसके बाद से अनीश ने इस खेल को अपनी जिंदगी बना लिया।