AAP BJP Blogs Congress Khabron se Hatkar Latest national Politics Politics

शपथ ग्रहण समारोह या 2019 में मोदी के लिए चक्रव्यूह!

शपथ ग्रहण
सौ. गूगल

-नितेश उपाध्याय

कांग्रेस के सहयोग से जेडिएस के एच.डी. कुमारस्वामी आज (बुधवार) कर्नाटक के 24वें मुख्समंत्री की शपथ लेने वा ले हैं। इस शपथ ग्रहण समारोह की सबसे ख़ास बात है पूरे विपक्ष का एक मंच पर होना। राजनीति के धुरंधरों का मानना है कि, ये समारोह कुमारस्वामी का शपथ ग्रहण कार्यक्रम कम और विपक्ष का शक्ति परीक्षण ज्यादा है।

ऐसा भी माना जा रहे है कि, इसी मंच से पूरा विपक्ष एत्रित होकर 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी के रथ को रोकने के लिए ख़ास रणनीति बना सकता है। ऐसा इस लिए कि, 2019 के चुनाव में मोदी को हराने के लिए विपक्ष को एक साथ आने के बयान कई बार विभिन्न पार्टियों के नेता देते आये हैं और अगर कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण की लिस्ट पर गौर फरमाऐं तो कहीं न कहीं इस बात पर मुहर लगती भी दिख रही है।

दरअसल, कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, दिल्ली के मुख्समंत्री अरविंद केजरीवाल, चंद्रबाबू नायडू, नवीन पटनायक और कैप्टन अमरेंद्र सिंह समेत कई नेता शिरकत करने वाले हैं, तो लाजमी है कि, इसी समारोह से विपक्ष 2019 की रणनीति बना सकता है।

हालांकि, ख़बरें तो ये भी हैं कि, राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह को ये बखूभी मालूम है कि, कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार ज्यादा दिनों तक टिकने वाली है, इस लिए उन्होंने अभी 2019 तक इस सरकार को स्थिर करने का फॉर्मूला भी सोचा है, ऐसा माना जा रहा है कि, अमित शाह इस काम के लिए संघ परिवार का साथ भी मांग सकते हैं।

दरअसल, अमित शाह को ये भी पता है कि, अगर गठबंधन की ये सरकार 2019 से ज्यादा दिन चली तो पार्टी को चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है। लिहाजा शाह ने विपक्ष के इस चक्रव्यूह को भेदने का मास्टक प्लान भी सोच लिया है।

अगर शपथ ग्रहण समारोह से पहले के कुमारस्वामी द्वारा दिए गये बयान को देखें तो उनका बयान भी ये साबित करता है ये गठबंधन की सरकार ज्यादा दिनों तक टिकने वाली नहीं है।

ऐसे में अमित शाह द्वारा सरकार को गिराने के लिए फेंका गया हर पासा गठबंधन की सरकार गिराने में मजबूती देगा। लिहाजा ये देखना दिलचस्प होगा कि, दोनों ओर बुने जा रहे राजनिति के ताने-बाने में कौन किसको मात देता है।

/* ]]> */