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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के उपराज्यापल को ऐसे लताड़ा है कि आप सोच भी नहीं सकते…

दिल्ली में कूड़े के ढेर कुतुबमीनार से 8 मीटर ही कम रह गए हैं। जी हां और यही सच्चाई है दिल्ली के कूड़े की। दिल्ली में कूड़े की समस्या को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने उपराज्यपाल, राज्य सरकार पर जमकर फटकार लगाई। लेकिन खासतौर पर उपराज्यपाल को खूब लताड़ा।

कूड़े के पहाड़ के लिए ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली में कूड़े के ढेर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि दिल्ली में कूड़े को लेकर ज़िम्मेदार कौन है, वो जो केंद्र सरकार के लिए जवाबदेही है यानि उपराज्यपाल या फिर जो जनता के लिए जवाबदेही है यानि दिल्ली सरकार?

25 बैठक करो या 50 चाय पियो, हमें मतलब नहीं

कूड़े के निस्तारण को लेकर उपराज्यपाल ने अपना पल्ला झाड़ लिया था और पूरा ठीकरा नगरीय इकाई के सिर पर फोड़ दिया था। अनिल बैजल ने 239AA का हवाला देते हुए कहा था कि इसके लिए नगर ज़िम्मेदार है। हम इसपर लगातार बैठक कर रहे हैं। तो इस बात पर सुप्रीम कोर्ट एलजी पर बरस गया और कहा कि आप 25 बैठक करें या 50 चाय पीए, इससे हमें मतलब नहीं। काम होता दिखाई देना चाहिए।

सिंपल अंग्रेजी में बताओ, कूड़ा कब हटेगा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप हर मसले पर मुख्यमंत्री को मत घसीटिए और सिंपल अंग्रेजी में बताइए की कूड़े के पहाड़ कब तक हटेंगे? याचिकाकर्ता ने कहा कि बैठकों में उपराज्यपाल के ऑफिस से कोई भी नहीं आया। तो इस बात पर जजों ने उपराज्यपाल से कहा कि आप कहते हैं कि मेरे पास पावर है, मैं सुपरमैन हूं लेकिन आप करते कुछ नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में रिपोर्ट मांगी है और कूड़ा बटोरने वालों को आईडी कार्ड मुहैया कराने और वेबसाइट पर अपडेट करने के आदेश दिए हैं।

दूसरी सरकारें भी कोर्ट के लपेटे में

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि दिल्ली में कूड़े के पहाड़ बने हैं, मुंबई पानी में डूब रही हैं। लेकिन सरकारें कुछ नहीं कर रही। कोर्ट ने मंगलवार को ठोस कूड़ा संबंधित नीतियों पर हलफनामा न दाखिल करने पर 10 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों पर जुर्माना लगाया था।

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