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Navratra 2018 -विदेशों में भी शक्तिपीठ की हैं अलग मान्यतायें

भारत में माता दुर्गा की पूजा के विशेष नौ दिन नवरात्र की शुरुआत हो गयी है लेकिन क्या आप ये जानते हैं की भारत के अलावा विदेशों में भी कई ऐसी जगहें हैं जहां शक्तिपीठ स्थापित है और सभी की अलग अलग मान्यताएं हैं।


पाकिस्तान हिंगुला शक्तिपीठ –
भारत के पडोसी देश पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित माता का ये शक्तिपीठ हिंगजाल देवी के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है की भगवन भोलेनाथ ने माता सती के जाने के वियोग में तांडव शुरू किया और तभी भगवान् विष्णु के चक्र से कटकर पाकिस्तान के इसी जगह पर उनका सिर गिरा था। इसकारण ही ये स्थान चमत्कारी और दिव्य माना जाता है। इस देवी को नानी का मंदिर और नानी का हज भी कहा जाता है।

 

बांग्लादेश स्थित  शक्तिपीठ
भारत के पूर्वोत्तर स्थित पड़ोसी देश बांग्लादेश में शिकारपुर नाम के जगह पर स्थित है उग्रतारा शक्तिपीठ। ये पीठ सुनंदा नदी के तट पर है और कहा जाता है की इस जगह माता सती की नासिका यानी नाक गिरी थी। इसके अलावा बांग्लादेश में तेन और जगहों पर शक्तिपीठ हैं। बांग्लादेश के भवानीपुर गांव में अपर्णा शक्तिपीठ जहां माता सती की बायें पैर की पायल गिरी थी। तीसरी शक्तिपीठ चटगांव में हैं जहां माता सती की दायी भुजा गिरी थी। इसके अलावा माता सती की बायीं हथेली यशोर नाम के जगह में गिरी थी।

 

नेपाल स्थित शक्तिपीठ
भारत के उत्तरी छोर स्थित पड़ोसी देश नेपाल में भी माता सती के कई शक्तिपीठ है। नेपाल में गंडक नदी पर आद्यशक्ति का पीठ है जहां माता सती का दायां गाल गिरा था। इस जगह माता को गंडकी रूप में पूजा जाता है। नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर के पास गुहेश्वरी मंदिर में माता सती के दोनों घुटने गिरे थे। इनके अलावा भी नेपाल के जनकपुर में वनदुर्गा ,जयमंगला और उग्रतारा मंदिरों को भी शक्तिपीठ माना जाता है।

 

श्रीलंका स्थित इन्द्राणी शक्तिपीठ
भारत कजे दक्षिणी छोर स्थिर पड़ोसी मुल्क श्रीलंका में माता सती की पायल गिरी थी और इस कारण यहां माता को इन्द्राणी रूप में पूजा जाता है।

 

तिब्बत स्थित मानस शक्तिपीठ
भारत के उत्तरी पूर्व स्थित तिब्बत में मानसरोवर नदी के किनारे है माता सती का मानस शक्तिपीठ जहां देवी सती की दायीं हथेली गिरी थी।

 

 

Bhagyashree

Infotainment Desk

 

 

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