Blogs dharam Khabron se Hatkar

क्या है भगवान शिव के बाघ खाल पहनने का रहस्य ?जानें यहां

हिन्दू धर्म में भगवान शिव के कई रूप और कथाएं हैं। उनकी महिमा के चर्चे सर्वोपरि है। हिन्दू पुराणों और कहानियों में भगवान शिव के जिस रूप को हम पूजते हैं या देखते हैं वो अद्भुत है। जिस तरह से शिव जी का रूप नज़र आता है उनका जो बाहरी आवरण है ,वो अलौकिक है। एक हाथ में जैसे डमरू ,उनके गले में लिप्टा हुआ सांप ,दूसरे हाथ में त्रिशूल ,उनके सिर के जटाओं से बहती अविरल गंगा धारा। उनके शरीर पर  लगा भस्म और शरीर पर बाघ की खाल लिपटी हुई। इसी रूप को हम पूजते आयें हैं लेकिन क्या आपके मन में ये जिज्ञासा नहीं उठी की आखिर शिवजी बाघ की खाल ही क्यों धारण करते हैं ?
उनके रूप में उनके साथ दिखने वाली हर एक चीज़ के पीछे एक कहानी छुपी है।


अब तक आपने शिवजी के रूप की जितने भी चित्र देखे होंगे उसमें या तो वो बाघ की खाल धारण किये हुए हैं या  उसे आसन बना उसपर बैठे हुए हैं। आइये जानते हैं की इस बाघ की खाल के पीछे क्या कहानी है ?अगर आपने शिव पुराण देखी हो या पढ़ी हो या किसी से शिव पुराण के बारे में ज्ञान लिया हो तो ये अवश्य जानते होंगे की इस बाघ के खाल की कहानी शिव पुराण में बताई गयी है। पुराणों के अनुसार इसके पीछे जो कथा है वो कुछ ऐसी है -एक बार भगवान शिव भ्रमण करते हुए एक जंगल जा पहुंचे जहां कई ऋषि मुनि अपने परिवारों के साथ निवास कर रहे थे। शिवजी उस वक़्त निर्वस्त्र थे और अनजान थे की उन्होंने कोई वस्त्र नहीं पहना हुआ है।
शिवजी के हृष्ट पुष्ट शरीर की काया देखकर उस जंगल में रहनेवाले ऋषि मुनियों की पत्नियों का ध्यान भटक गया और वो उनकी ओर आकर्षित होने लगीं। जिसे देख ऋषियों को बहुत गुस्सा आया और उन्हें ये एहसास हुआ की शिवजी के कारण उनकी पत्नियां अपना काम से  भटक रही हैं और क्रोधवश सभी ऋषियों ने भगवान शिव को मज़ा चखाने के लिए एक योजना तैयार की। उन्होंने शिवजी के रास्ते में एक बड़ा गड्ढा बनाया ताकि शिवजी जब उधर से गुज़रे तो उसमे गिर जाएं। ऋषियों के योजना के अनुसार शिवजी उस गड्ढे में गिर गए तभी ऋषियों ने उसमें एक बाघ भी गिरा दिया ताकि वो शिवजी को मार दें। बता दें की ये सभी ऋषि भगवान शिव को एक साधारण मनुष्य समझ रहे थे। लेकिन उस गढ्ढे में जो हुआ वो सबको चकित कर गया। भगवान शिव ने उस बाघ को मार कर उसकी खाल को पहना और गढ्ढे से बाहर आ गए। ये नज़ारा देख सभी ऋषि मुनि को ये ज्ञात हुआ की ये व्यक्ति कोई साधारण मनुष्य नहीं हो सकता ,और सभी ऋषि गण शिवजी के पैरों में गिर गए। तब से भगवान शिव बाघ की खाल पर विराजित होते हैं जो बुराई पर अच्छाई के विजय को दर्शाता हैं और शिव को सर्वशक्तिमान सिद्ध करता है। 

/* ]]> */