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अपने जर्मन शेफर्ड को बीमारियों से बचाना है तो इस तरह करें देखभाल..

लंबे समय तक साथ रहने के कारण पालतू जानवरों, पक्षियों से लोगों को लगाव हो जाता है और ये जानवर भी घर के सदस्य जैसे ही बन जाते हैं. बड़ों के साथ-साथ घर के बच्चे भी इन जानवरों और पक्षियों के साथ खेलते-कूदते हैं. कुछ लोग तो जानवरों को अपने साथ ही सुलाते, खिलाते और रखते हैं. ये अच्छी बात है कि आप किसी जीव को घर के सदस्य की तरह प्यार देते हैं.  तो जानिए कि इनको पालने के लिए आपको क्‍या क्‍या सावधानियां रखनी चाहिए। 

 

– जर्मन शेफर्ड के बाल दो परतो में होते हैं। उप्परी जो की साल भर झडते रहते है और भीतरी जो की काफी घने और खाल के करीब होते है। जहां तक हो आपको इनके बालों को रोज़ ब्रश से झाड़ने चाहिए।

– इनके वजन को हमेशा नियंत्रित रखें क्योंकि इनका बढ़ते ही हार्ट की समस्‍या या फिर आर्थ्राइटस का रोग भी हो सकता है। एक जर्मन शेफर्ड का औसत वजन 55-65 के बीच ही होता है।

– मोतियाबिंद, कैल्शियम गाउट, क्रोनिक पैनक्रियाइटस, हिप और कोहनी डिसप्‍लेसिया, मिर्गी, हीमोफिलिया, स्‍लिप डिस्क और रेटिनल एथ्रोपी बीमारिया आम हैं, जो इन्‍हें हो सकती हैं, इसलिए इनका खास ध्‍यान रखें।

– यह काफी ऊर्जावान होते हैं इसलिए जरुरी है कि आप इन्‍हें रोज़ बाहर ले जाएं और इनके साथ खेलें। इन्‍हें व्‍यायाम करने की भी आवश्‍यकता भी होती है।

– इन्‍हें रोज़ नहाने की जरुरत नहीं होती। इसलिए इन्‍हें हफ्ते में केवल 3 बार नहलाना चाहिए पर बाल इनके रोज़ झाडने चाहिए जिससे कि इनके बाल कम झड़ें।

 

 

–  हर दूसरे हफ्ते इनके पैरों के नाखून काटें जिससे यह पैरों के     संक्रमण और एर्ले‍जी से बचे रहें। इनको जमीन में मिट्टी खोदना    बहुत पसंद है इसलिए यह जब भी बाहर से वापस लौटें तो     इनके पैरों को अच्‍छे से साफ करना चाहिए।

– यह डॉग टॉय को बड़े मजे से चबा कर खाते हैं। इसलिए जरुरी    है कि इनके मनोरजंन के लिए यह दें।

– इनकी हर आदत के लिए एक समय र्निधारित करें। इनके खाने का समय, सोने और टहलने का समय पक्‍का कर लेने से इनमें     अनुसाशन आएगा।

– संक्रमण से बचाने के लिए इनके कानों और दांतो को रेगुलर     साफ करना चाहिए।

–  जब भी परिवारजन एक साथ खाना खा रहे हों तो अपने कुत्‍ते   को भी साथ में ही खिलाएं। उन्‍हें बिल्‍कु भी ऐसा महसूस न होने    दें कि वह अलग हैं। पर उनकी ज्‍यादा लाड़ प्‍यार से आदत भी     न बिगाड़े।

– इनकी डाइट में पौष्‍टिक तत्‍व शामिल होने जरुरी हैं जैसे, मीट,   गाजर, दूध आदि से यह स्‍वस्‍थ्‍य और एक्‍टिव रहते हैं।

 

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