infotainment social media

इस महिला के साथ तांत्रिक ने जो किया! उससे पाखंड और अंधविश्वास को बढ़ावा मिलता है

उत्तर से लेकर दक्षिण… और पूरब से लेकर पश्चिम तक, आप कहीं भी चले जाईये आपको ढोंगी बाबाओं की लंबी फेहरिस्त मिल जाएगी. आसाराम, आशु महाराज उर्फ आशिफ ख़ान और राम रहीम वो नाम हैं जो अपनी हरकतों की वजह से आज जेल के अंदर हैं. लेकिन सवाल है कि इन पाखंडी बाबा और तांत्रिकों को बढ़ावा कौन देता है? जवाब होगा जनता. अब जनता ही होती है जो किसी को भी बनाती और बिगाड़ती है. अगर लोग इन तांत्रिकों और बाबाओं के पास जाना छोड़ दें तो अंधविश्वास एक हद तक खत्म हो जाएगा. इतनी सारी फिल्में और असल कहानियों से भी लोग सीख नहीं लेते और इस तरह के लोगों का मनोबल बढ़ता रहता है. दरअसल ये सारी बातें जुड़ी हुईं झाबुआ में घटित हुई घटना से, जहां कैसे एक महिला को सांप के काटने पर अस्पताल ले जाने के बजाय कहां किस जगह ले जाया गय.

अंधविश्वास…पाखंड

मध्यप्रदेश में जिला है झाबुआ, कहने को तो यहां 1 जिला अस्पताल …1 सिविल अस्पताल…6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र…17 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र…और 240 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं लेकिन बावजूद इसके तंत्र विद्याओं का जाल इतना मजबूत और प्रभावशाली है कि यहां महिला को सांप के काटने पर अस्पताल ले जाने की जगह एक तांत्रिक के पास ले जाया जाता है. फिर क्या होना है तांत्रिक अपने तंत्र ज्ञान का भरपूर इस्तेमाल करता है और महिला को प्रताड़ित करता है. गौर करने वाली बात ये है कि ये सब उस महिला और उसके परिजनों की सहमति से होता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

अंधविश्वास और पांखड का खेल ऐसा है कि सही सलामत व्यक्ति भी यहां जाकर अपनी बुद्धि खराब कर ले. और सांप द्वारा काटी गई महिला के साथ भी ऐसा ही हुआ. जब महिला को उसके परिजन तांत्रिक के पास ले गए तो वहां महिला का इलाज कुछ इस तरह हुआ… पहले महिला की पीठ से कपड़े हटाए गए फिर पीठ पर तांबे की थाल चिपकाई गई और उसके बाद जो हुआ वो बेहद अजीब है क्योंकि महिला की पीठ पर तब तक पत्थर कंकर मारे गए जब तक तांबे की थाली गिर नहीं गई. अब इसे आप क्या कहेंगे? अंधविश्वास…बेवकूफी या अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना क्योंकि अस्पताल न जाते हुए किसी पाखंडी के पास जाना बेवकूफी ही कहलाएगा.

बहरहाल इस सब के बाद महिला ठीक हो जाती है, पीड़ित महिला और उसके परिजनों को लगा कि ये सब उस तांत्रिक के टोटके का कमाल है, लेकिन असल में माजरा कुछ और है. दरअसल इस सबको को लेकर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जो इलाके में सांप हैं उनका ज़हर ज्यादा असर दार नहीं है. थोड़ी जड़ी बूटी से भी ज़हर का असर कम हो जाता है. इसी का फायदा तांत्रिक उठाते हैं.

सीख लेने की ज़रूरत

जितनी हैरान करने वाली ये घटना है उतना ही सोचने पर भी मजबूर करती है कि सच में हम आधुनिक हो रहे हैं. या सिर्फ ये आधुनिकता की चादर शहरों तक ही सीमित है. बहरहाल ये कोई पहली घटना नहीं है, आए दिन कहीं न कहीं से ऐसी तस्वीर आ ही जाती है. झाबुआ जैसी घटनाओं से ही तंत्र मंत्र हावी होता है और यही आगे जाकर अंधिवश्वास की परत को और मोटा कर देता है. जरूरत है तो बस असलियत समझने की जो न सिर्फ आपका भला करे बल्कि दूसरों का भी.

/* ]]> */