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“पद्मावत” फ़िल्म रिव्यू : ये हैं फ़िल्म की असली सच्चाई

जिस फिल्म को लेकर पिछले 2 साल से संजय लीला भंसाली राजपूतों का विरोध झेलते आ रहे थे, और जिस फ़िल्म को लेकर करणी सेना के गुंडों ने देश के विभिन्न शहरों में आगजनी की, आख़िरकार उस फ़िल्म का रिव्यू अब जनता के सामने आ गया है। फ़िल्मी क्रिटिक्स की मानें तो इस फ़िल्म मैं विरोध करने लायक कुछ है ही नहीं। रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण के साथ – साथ संजय लीला भंसाली ने जो मेहनत की है वो ज़रूर देखने को मिली है। भंसाली के निर्देशन ने एक बार फिर साबित कर दिया है उनमें इतिहास को ज़िंदा करने का माद्दा है।
हालांकि बात फ़िल्म की और इसकी कहानी की करें तो फ़िल्म के शुरुआत में ही दर्शकों को ये बता दिया जाता है कि, ये फ़िल्म  ‘पद्मावत’ मलिक मुहम्मद जायसी की कहानी पर आधारित है। फिल्म की कहानी राजा रतन सिंह की है।  जिसे सिंहल की पद्मावती से इश्क हो जाता है। फिर पद्मावती रानी बनती है, लेकिन फिर एक गद्दार आता है और अलाउद्दीन खिलजी को रानी पद्मावती को लेकर भड़का देता है और चित्तौड़ से बदला लेने पर उतर आता है।
आपको बता दें कि, फ़िल्म में उतना ही दिखाया गया है जितना हम सबने अब तक पढ़ा है। लेकिन रणवीर सिंह ने अलाउद्दीन खिलजी का ऐसा रोल प्ले किया है कि, मानों स्वम् अलाउद्दीन खिलजी ने अभिनय किया है। रणवीर सिंह की डायलॉग डिलीवरी के आगे शहीद कपूर भले ही फीके लग रहे हों, लेकिन इस फ़िल्म में उनके द्वारा किये गए अभिनय से साफ़ हो गया है वो भी एक्टिंग में किसी से कम नहीं हैं। और अब बात उस किरदार की जिसको लेकर पूरा विवाद खड़ा हो गया, जी हाँ रानी पद्मावती की। मस्तानी के बाद दीपिका का पद्मावती अंदाज जेहन में बस जाता है, और जौहर करने के दौरान उनके चेहरे पर आने वाले भाव और तेज वाकई दीपिका के बस की ही बात है। पारंपरिक कैरेक्टर में उनका कोई तोड़ नहीं है।
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