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अब सरकारी स्कूल के स्टूडेंट्स भी बोलेंगे इंग्लिश, “आप” सरकार की शानदार योजना

सरकारी स्कूल के बच्चे बोलेंगे इंग्लिश

दिल्ली की आम आदमी पार्टी लगातार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करती जा रही है. इसी कड़ी में दिल्ली सरकार ने एजुकेशन रिफॉर्म्स को आगे बढ़ाते हुए सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की इंग्लिश कम्युनिकेशन स्किल को बेहतर बनाने की एक योजना बनाई है. जिसके तहत जिन स्टूडेंट्स ने दसवीं के बोर्ड एग्जाम दिए हैं, उनके लिए फर्स्ट फेज में स्पोकन इंग्लिश क्लासेज प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है. इस कोर्स में स्टूडेंट्स की स्पोकन इंग्लिश पर काम किया जाएगा. और 1 जून से ये क्लासेज शुरू होंगी और इनके लिए 393 स्कूलों में ट्रेनिंग सेंटर्स बनाए जाएंगे. 

ये है दिल्ली सरकार की योजना

बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार कई एजेंसियों से बातचीत कर रही है, जिनमें ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया, मैकमिलन पब्लिशर्स, और अकैडमी फॉर कम्प्यूटर्स ट्रेनिंग (गुजरात) शामिल हैं. और इन एजेंसियों की मदद से दिल्ली सरकार स्टूडेंट्स की इंग्लिश को बेहतर बनाएगी.

 23 से 80 दिनों तक चलने वाली इन क्लासेज की अवधि करीब 160 घंटे होगी. गर्मियों की छुट्टियों में फर्स्ट फेज होगा, जिसमें रोजाना 5 से 7 घंटे की क्लासेज होंगी. सेकंड फेज में 2 से 3 घंटे की क्लासेज होंगी.

किन बच्चों को मिलेगा मौका

सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि दसवीं के बोर्ड एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स के लिए अभी ये क्लासेज होंगी और जिन स्टूडेंट्स ने प्री बोर्ड एग्जाम में इंग्लिश समेत कम से कम दो और सब्जेक्ट्स पास किए होंगे, उन्हें ये क्लासेज अटेंड करने का मौका मिलेगा. 

फर्स्ट फेज में 24000 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन होगा और फर्स्ट कम फर्स्ट सर्व के बेसिस पर सिलेक्शन होगा.  अगर प्री बोर्ड में स्टूडेंट्स ने इंग्लिश समेत सारे सब्जेक्ट पास किए होंगे, तो ऐसे स्टूडेंट्स को प्राथमिकता मिलेगी. 

स्कूल के प्रिंसिपल्स की होगी जिम्मेदारी

प्रिंसिपल्स की यह जिम्मेदारी होगी कि वे दसवीं का एग्जाम दे चुके स्टूडेंट्स को फोन, एसएमएस के जरिए इस योजना की जानकारी दें. स्कूल मैनेजमेंट कमिटी की भी मदद ली जा सकती है ताकि वे स्टूडेंट्स तक यह जानकारी पहुंचाएं. रजिस्ट्रेशन करवाने वाले स्टूडेंट्स को कोर्स मटीरियल और असाइनमेंट भी दिए जाएंगे और कोर्स पूरा करने के बाद सर्टिफिकेट दिए जाएंगे.

दरअसल देखने में आता है कि 12वीं पास करने के बाद सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को ग्रैजुएशन लेवल तक पर स्पोकन इंग्लिस में परेशानी होती है. जिसको देखते हुए सरकार ने  ये फैसला लिया है. वहीं इस योजना से उन स्टूडेंट्स को जरूर फायदा होगा जो सीखना चाहते हैं.