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नवरात्री स्पेशल: जानिए कालका जी मंदिर से जुड़ी खास बातें

कालका जी

दक्षिणी दिल्ली में विराजमान कालकाजी मंदिर के नाम से विख्यात ‘कालका मंदिर’ देश के प्राचीनतम सिद्धपीठों में से एक है। माँ के भक्त यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। इस मंदिर को जयंती पीठ और मनोकामना सिद्ध पीठ भी कहा जाता है | नाम के अनुसार भक्तों की यहां सारी मनोकामनायें पूर्ण होती हैं| इस पीठ का अस्तित्व अनादि काल से माना गया हैं, और हर काल में इस जगह का स्वरुप बदला है| यह मंदिर माँ काली को समर्प्रित है जो असुरों के संहार के लिए अवतरित हुईं थी | तब से यह मनोकामना सिद्धपीठ के रूप में विख्यात है। मौजूदा मंदिर उनके परम भक्त बाबा बालक नाथ ने स्थापित किया।

 

यहां आने से होती हैं मनोकामनाएं पूरी

 

कालका मंदिर या कालकाजी मंदिर भारत के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित प्राचीन मंदिरों में से एक है। इसे ‘जयंती पिठ’ या ‘मनोकमना सिद्ध पीठ’ भी कहा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां माता के दर्शन कर सच्चे दिल से मनोकमना मांगने से सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं. इसलिए, यह पवित्र मंदिर है जहां किसी की इच्छाओं को पूरा करने के लिए मॉ कालका देवी (देवी श्री कालिका देवी) का आशीर्वाद मिलता है। यह प्रसिद्ध बहाई लोटस मंदिर के सामने ओखला औद्योगिक क्षेत्र के पास स्थित है।

 

माँ काली का प्रकट होना

एक बार स्वर्ग के देवता ने असुरों द्वारा सताये जाने पर भगवती की पूजा अर्चना की | देवताओं की पूजा से खुश होकर माँ ने कौशिकी देवी को अवतरित किया जिन्होंने अनेकों असुरों का संहार किया लेकिन रक्तबीज नाम के असुर से पार नहीं पा सकीं | तब माँ जगदम्बे ने महाकाली को प्रकट किया जिन्होंने रक्तबीज को ख़त्म किया | महाभारत काल में युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के साथ यही विजय प्राप्ति के लिए कालका माँ से विनती की थी | बाद में बाबा बालकनाथ ने इस पर्वत पर तपस्या की। तब माता भगवती से उनका साक्षात्कार हुआ।

 

मंदिर की विशेषता

इस मंदिर के मुख्य 12 दरवाजें हैं, जो 12 महीनों का संकेत देते हैं। हर द्वार के पास माता के अलग-अलग रूपों का भक्तिमय चित्रण किया गया है। मंदिर के परिक्रमा में 36 मातृकाओं (हिन्दी वर्णमाला के अक्षर) के द्योतक हैं। माना जाता है कि ग्रहण में सभी ग्रह इनके अधीन होते हैं। इसलिए दुनिया भर के मंदिर ग्रहण के वक्त बंद होते हैं, जबकि कालका मंदिर खुला होता है।

 

नवरात्र में माँ का आगमन

9 दिनों के नवरात्रों में मान्यता है कि अष्टमी व नवमी को माता मेला में घूमती हैं इसलिए अष्टमी के दिन सुबह की आरती के बाद कपाट खोल दिए जाते हैं,  दो दिन आरती नहीं होती दसवीं को आरती होती है।

 

मंदिर पहुंचने का रास्ता

माता के दर्शन करने के लिए मेट्रो से कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन उतरकर लोग आसानी से पहुंच सकते हैं। जो बदरपुर मेट्रो लाइन पर स्थित है।

 

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