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फिल्मी दुनिया के डॉन की तरह नाम कमाना चाहता था मुन्ना बजरंगी

मुन्ना बजरंगी, एक ऐसा नाम जिसके नाम से क्राईम की दुनिया के बड़े से बड़े खिलाड़ी मैदान छोड़ दिया करते थे… मुन्ना बजरंगी, क्राईम की दुनिया का ऐसा सरताज़ जिसने जिसके टारगेट से बचना किसी का भी नामुकिन था। सोमवार को उसी मुन्ना बजरंगी की ज़िन्दगी का ‘दी एण्ड’ हो गया। मुन्ना बजरंगी कैसे क्राईम की दुनिया का इतना बड़ा डॉन बन गया ? आखिर उसको डॉन बनाने में किसने अहम भूमिका निभाई? और उसका पहला शिकार कौन था? उसके बारे में ऐसे ही तमाम छुपे हुए पहलू जानने के लिए हमें कुछ सालों पीछे जाना होगा।

दरअसल, मुन्ना बजरंगी उर्फ़ प्रेम प्रकाश सिंह का जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। कहा जाता है कि प्रेम प्रकाश सिंह के पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखा कर एक अच्छा और क़ाबिल इंसान बनाना चाहते थे। लेकिन, फिल्मी दुनिया के डॉन को अपने दिल में बसाये मुन्ना का मन पढ़ाई में कहां लगने वाला था वो चाहता था कि, रील का दुनिया की तरह रीयल दुनिया में उसके नाम से भी लोग थर्रा उठें। लिहाज़ा उसका पांचवी कक्षा के बाद ही मोह भंग हो गया।

मुन्ना का नाम 17 की उम्र पुलिस के रजिस्टर में उस वक्त दर्ज हो गया जब उसे अवैध असलाह और मारपी के आरोप में हिरासत में लिया गया था। जिसके कुछ दिनों बाद मुन्ना तो पुलिस के चंगुल से आज़ाद हो गया लेकिन उसके अरमान क्राईम की दुनिया में क़ैद होते चले गए। जिसका नतीजा ये हुआ कि, मुन्ना ने सन 1984 में एक व्यापारी के साथ लूट को अंजाम देना चाहा जब व्यापारी ने उसका विरोध किया था तो मुन्ना ने व्यापारी के सीने में गोली दाग़ दी।

व्यापारी की हत्या के बाद मानो मुन्ना के मुंह खून लग गया था। उसके इरादे और फौलादी होते गए। वो क्राईम की दुनिया में और बड़ा करना चाहता था। लिहाज़ा उसने एक और बड़ी घटना को उस वक्त अंजाम दिया जब उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया।

अब धीरे-धीरे पूर्वांचल में मुन्ना के नाम की तूती बोलनी शुरु हो गई, लोग और पुलिस महकमा मुन्ना के नाम पर चर्चा करने लगे थे। जैसे-जैसे क्राईम की दुनिया में उसकी ख्यति बढ़ती रही थी वैसे-वैसे उसके उसके करदान भी बढ़ते जा रहे थे।

90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। यह गैंग मऊ से संचालित हो रहा था, लेकिन इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था। मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद इस गैंग की ताकत बहुत बढ़ गई।

पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था। लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे। उन पर मुख्तार के दुश्मन ब्रिजेश सिंह का हाथ था। उसी के संरक्षण में कृष्णानंद राय का गैंग फल फूल रहा था। इसी वजह से दोनों गैंग अपनी ताकत बढ़ा रहे थे। इनके संबंध अंडरवर्ल्ड के साथ भी जुड़े गए थे। कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था। उन्होंने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी।

29 नवंबर 2005 को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय को दिन दहाड़े मौत की नींद सुला दिया। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लखनऊ हाइवे पर कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर AK47 से 400 गोलियां बरसाई थी। इस हमले में गाजीपुर से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे 6 अन्य लोग भी मारे गए थे। पोस्टमार्टम के दौरान हर मृतक के शरीर से 60 से 100 तक गोलियां बरामद हुईं थी। इस हत्याकांड ने सूबे के सियासी हलकों में हलचल मचा दी। हर कोई मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगा. इस हत्या को अंजाम देने के बाद वह मोस्ट वॉन्टेड बन गया था।

क्राईम की दुनिया मं धाक जमाने के बाद अब मुन्ना इससे ऊब चुका था। वो अब देश की राजनीति से मुख्यधारा में आने की कोशिश करना चाहता था लिहाज़ा एक बार मुन्ना ने लोकसभा चुनाव में गाजीपुर लोकसभा सीट पर अपना एक डमी उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश की। मुन्ना बजरंगी एक महिला को गाजीपुर से भाजपा का टिकट दिलवाने की कोशिश कर रहा था। जिसके चलते उसके मुख्तार अंसारी के साथ संबंध भी खराब हो रहे थे। यही वजह थी कि मुख्तार उसके लोगों की मदद भी नहीं कर रहे थे। बीजेपी से निराश होने के बाद मुन्ना बजरंगी ने कांग्रेस का दामन थामा। वह कांग्रेस के एक कद्दावर नेता की शरण में मुंबई चला गया।

उत्तर प्रदेश समते कई राज्यों में मुन्ना बजरंगी के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज थे। वो पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुका था।

29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। माना जाता है कि मुन्ना को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था। इसलिए उसने खुद एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी। मुन्ना की गिरफ्तारी के इस ऑपरेशन में मुंबई पुलिस को भी ऐन वक्त पर शामिल किया गया था। बाद में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली के विवादास्पद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक है। इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया। तब से उसे अलग अलग जेल में रखा जा रहा है।

सोमवार को उसी मुन्ना बजरंगी की ज़िन्दगी का ‘दी एण्ड’ हो गया। जानकारी के अनुसार उसके शरीर में 10 गोलियां दागी गईं है। मुन्ना की हत्या कियने की है ये तो अभी स्पष्ट नही हो सका है हालाकि की मुन्ना की पत्नी ने एसटीएफ के एक अधिकारी और कई सफेदपोश पर हत्या कराने का शक जताया है। फिलहाल पुलिस की तहकीकात जारी है। पुलिस जल्द से जल्द मुन्ना के कातिलों को गिरफ्तार करने का दावा कर रही है। वहीं सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए हत्या में आरोपित सभी लोगों को गिरफ्तार करने के हुक्म दिए हैं।

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