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जानिए! क्या होता है आत्महत्या करने के बाद आत्माओं का?

पिछले दिनों दिल्ली के बुराड़ी के एक घर में एक साथ 11 लोगों द्वारा आत्महत्या करने बाद इलाके के लोगों में दहशत है। लोगों का कहना है कि, उन्हों रात के समय में न सिर्फ डर लगता है। बल्कि उन्हें ऐसा प्रतीत होता है उन्हों पीछे से कोई आवाज़ देता है। लिहाज़ा हम इस खबर में ये जानने की कोशिश करेंगे कि आत्महत्या के बाद इंसान की आत्मा के साथ क्या होता है क्या उसे मोक्ष मिल पाता है? 

दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 लोगों द्वारा आत्महत्या करने के बाद इलाके के लोगों को एक अलग तरह का डर सताने लगा है। इलाके के लोगों का कहना है कि इस घटना के बाद उन्हें कुछ अजीब सी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें कुछ सुनाई देता है। अब सवाल ये उठता है कि आत्महत्या करने के बाद भाटिया परिवार को मोक्ष की प्राप्ति नहीं हुई?  और अगर 11  लोगों को मोक्ष नही मिला तो उनकी आत्माओं को क्या हुआ होगा। ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब हर कोई जानना चाहता है।

 दरअसल, हिन्हु धर्मग्रंथों के अनुसार इंसान का जन्म 14 लाख योनियों तक कड़ी तपस्या करने के बाद मिलता है। इस दौरान आत्मा विभिन्न- विभन्न रुपों में जमीन पर पैदा होती है और चला जाती है। लिहाज़ा इन 14 लाख योनियों को ग्रंथों में कड़ी तपस्या करार दिया गया है। कहा जाता है कि यह भगवान की मर्जी है कि वे किसी रूह को इंसानी रूप में पृथ्वी पर भेजते हैं। उनका उस आत्मा को यह मौका देने का उद्देश्य होता है उसे आध्यात्म से जोड़ना। प्रभु चाहते हैं कि वह पृथ्वी लोक पर जाकर महान ग्रंथों को समझे, अच्छे कर्म करे और अपने जीवन से मुक्ति पाकर स्वर्ग लोक में शामिल हो जाए।

 लेकिन सवाल अभी यही बना हुआ है कि आत्महत्या करने के बाद इंसान का क्या होता है?

इस बारे में महान थेसोफिस्‍ट मास्टर कूट हूमी का कहना है कि जो लोग आत्‍महत्‍या कर लेते हैं इसका मतलब यह नहीं कि वह पूरी तरह से मर गए, लेकिन इसका सिर्फ यह अर्थ होता है कि उस व्‍यक्ति को शारीरिक रूप से कोई कष्‍ट अब इस संसार में नहीं रह गया। आत्‍महत्‍या एक निंदनीय कार्य है जिसमें व्‍यक्ति संघर्ष करने से घबराकर जान देना उचित समझता है।

हिन्दू ग्रंथों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जो व्‍यक्ति आत्‍महत्‍या करता है उसकी आत्‍मा को शांति नहीं मिलती है और वो हमारे बीच ही भटकती रहती है, न ही उसे स्‍वर्ग/नर्क में जाने को मिलता है न ही वह जीवन में पुन: आ सकती है। ऐसे में आत्‍मा अधर में लटक जाती है, वो तब तक अंतिम स्‍थान पर नहीं जाते हैं जब तक उनका समय नहीं हो जाता है।

वहीं एक और ग्रंथ के अनुसार जब कोई मनुष्य अपना शरीर छोड़ आत्मा रूप धारण कर लेता है तो उसे पृथ्वी के अलावा अन्य 13 स्थानों में से किसी एक स्थान पर भेजा जाता है। इस प्रकार से आत्महत्या करने वाले इंसान को 7 नर्क स्थान में से किसी एक नर्क की दुनिया में भेजा जाता है। उस इंसान को यहां कम से कम 60,000 पृथ्वी के वर्ष समान वर्ष व्यतीत करने होते हैं। मान्यता है कि नर्क का यह स्थान ऐसा है जहां रोशनी की एक किरण भी नहीं होती। यह एक ऐसा स्थान है जो किसी शिकारी को परिंदे में बांधकर रखने के योग्य लगता है। यहां दुख, पीड़ा और अंधकार के अलावा इंसान को कुछ भी हासिल नहीं होता है। आत्महत्या का फैसला लेने वाला इंसान ना मरने से पहले सुख ले पाता है और ना ही मरने के बाद सुख रहने के लायक रहता है। अपनी जिंदगी के दौरान उसने अनगिनत दुख झेले। यह जरूरी नहीं कि आत्महत्या करने वाला इंसान बुरा था इसीलिए उसे नर्क हासिल हुआ।

 देख जाए तो आत्महत्या करना प्रकृति के खिलाफ़ जाना है। ऐसे में इंसान की आत्मा का जीवन चक्र बिगड़ जाता है और वो तब कर विभिन्न स्थानों पर भटकता रहता है जब तक भगवान द्वारा निर्धारित उसकी आत्मा की समयावधि खत्म नहीं हो जाती है। लिहाज़ा आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि बुराड़ी के 11 लोगों की आत्मा कहां और किस हालत में होगी। सनातन धर्म के ग्रथों में जो कुछ भी कहा गया है अगर वह सच है तो बुराड़ी के निवासियों का डरना लाज्मी है।

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