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कोलकाता का दुर्गा पूजा आखिर क्यों हैं इतना स्पेशल -भाग्यश्री गुप्ता की कलम से

An Indian Deity : Goddess Durga. Durga Puja or worship is a yearly event and these deities are created every year and immersed in a river every year after the completion of the 5-day event.

By-Bhagyashree Gupta

देशभर में नवरात्र का त्यौहार धूम धाम से मनाया जा रहा है लेकिन देश के पूर्वोत्तर राज्य पश्चिम बंगाल में ये त्यौहार सिर्फ एक उत्सव नहीं बल्कि इस प्रदेश के लोगों की सभ्यता और उनका मान है। मैं भी कोलकाता से सम्बन्ध रखती हूँ इसलिए दुर्गा पूजा( जैसा की नवरात्र को वहां कहा जाता है ) के दौरान कोलकाता से दूर होकर इन ख़ास दिनों को बहुत मिस करती हूँ। कोलकाता में जन्मी और पली बढ़ी इसलिए इस जगह से विशेष कनेक्शन जुड़ा हुआ है दुर्गा पूजा के समय वहां ना रहने से मन जैसे वही के माहौल में खोया हुआ है क्यूंकि इसका असली मज़ा सिर्फ बंगाल में ही आ सकता है और ये बात सिर्फ मैं नहीं बल्कि कोलकाता शहर की हर गली, हर निवासी ,हर किनारा कहता है।

पिछले दो सालों से मैं दिल्ली एनसीआर में होने के कारण कोलकाता का दुर्गा पूजा मिस करती आयी हु क्यूंकि यहां दुर्गा पूजा में वो रौनक और बात नहीं जो मेरे कोलकाता में हैं। आप सभी जो इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं उन्हें मैं  एक सुझाव ज़रूर देना चाहूंगी की दुर्गा पूजा में यदि आप कभी बंगाल नहीं गए तो एक बार ज़रूर जाएं क्यूंकि दुनिया में सबसे बेस्ट दुर्गा पूजा सिर्फ और सिर्फ कोलकाता में ही होती है।

आइये आपको बताते हैं की दुर्गा पूजा में कोलकाता में क्या करें ,क्या खाएं और कौन सी चीज़ें बिलकुल ना छोड़े। ये जानकर आपको भी कोलकाता जाने का मन ज़रूर कर जाएगा। और अगर आप वहीं हैं तो आपके लिए मज़े दुगुने होंगे।

कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान जो सबसे मज़ेदार चीज़ होती है करने को वो हैं पूजा पंडालों के दर्शन। इस शहर में छोटे से लेकर विशाल पूजा पंडाल तैयार होते हैं। ये पूजा पंडाल साधारण नहीं बल्कि थीम पर बनाये जाते हैं जो देखकर आप इस अनोखे कला की तारीफ़ करते नहीं थकेंगे। महीनो पहले से ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती है और निर्माण करने वाले कलाकार रात दिन पंडाल और मूर्ति पर काम करते हैं। पूरी पूरी रात लोग अपने परिवार के साथ पूजा पंडालों की सैर करते हैं। पैर थकते नहीं , उत्साह कम होता नहीं और बच्चे ,बूढ़े सब नए पोशाकों में सज धजकर निकल पड़ते हैं। यही है कोलकाता के पूजा का कल्चर।

बात हो दुर्गा पूजा की और खानपान की बात ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता। कोलकाता में पूजा पंडाल घूमने का मतलब है ढेर सारे पकवानों का मज़ा लेना। यहां के स्ट्रीट फ़ूड की बात ही कुछ और हैं। लज़ीज़ गोलगप्पे जिसे यहां पुचका कहा जाता है। यहां पर लोग ख़ास तौर पर रोल खाना बहुत पसंद करते हैं जैसे चिकन रोल या अंडा रोल और शाकाहारी पनीर रोल ,चाउमीन यहां के मशहूर आधी रात की स्ट्रीट फ़ूड है । मिठाई में रसगुल्ला ,मिष्टी दही यहां का फेवरिट है। इनका स्वाद अगर एक बार आपने ले लिया तो खाते रह जाएंगे।

स्ट्रीट फ़ूड के अलावा यहां के रेस्टॉरेंट में भी दुर्गा पूजा स्पेशल मेनू रहती है जो रात भर लोगों के लिए खुले रहते हैं। कोलकाता की मशहूर बंगाली डिशेस के अलावा भी कई ट्रेडिशनल थालियां बनायीं जाती हैं। अगर आप फूडी है तो कोलकाता में इस दौरान खाना ज़रूर चखें।

धुनुची डांस जो आपको यहां नवमी के दिन ज़रूर देखने को मिलेगी। आपने यकीनन कुछ फिल्मों में मिटटी के एक घड़े के साथ डांस करते हुए देखा होगा दुर्गा पूजा के दौरान इस ख़ास ट्रेडिशनल डांस को धुनुची डांस कहा जाता है। ढाक के नगाड़ों के साथ इस डांस को परफॉर्म किया जाता है। ढाक बजना भी कोलकाता के दुर्गा पूजा का अहम हिस्सा है।

अष्टमी के दिन लोग ख़ास श्रृंगार कर पूजा पंडालों में पुष्पांजलि देने पहुंचते हैं जहाँ पंडित मन्त्रों के साथ पुष्पों को हाथ में लिए मां की पूजा करवाते हैं। दुर्गाष्टमी जैसा की इस दिन को कहा जाता है खास कर इस दिन विशेष पूजा होती है और प्रसाद भी बनाया जाता है।

नवमी के दिन कुंवारी कन्या पूजन सभी पंडालों में आपको देखने को मिलेगा। जहां छोटी बच्चियों को कन्या स्वरुप पूजा जाता है। अष्टमी और नवमी के ठीक मध्य रात्रि को संधि पूजा की जाती है जो सभी पंडालों में मध्यरात्रि होता है और कहा जाता है की इस पूजा से दुर्गा मां की प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है.

विजयादशमी वाले दिन देवी मां को सिंदूर लगाया जाता है जिसे बंगाल में सिन्दूरखेला बोला जाता है जहाँ सभी सुहागिनें एक दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इस दिन भी विशेष भोज का आयोजन होता है और बंगालियों के यहां इस दिन मांसाहारी पकवान बनते हैं।

 

तो उम्मीद करती हूं की मेरे इस लेख से आप कोलकाता के दुर्गा पूजा की एक मनमोहक छवि मन में ज़रूर बना चुके होंगे तो बस कर लीजिये तैयारी और कर आइये कोलकाता की सैर। हालांकि मैं एक बार फिर दुर्गा पूजा में कोलकाता से दूर हूं मगर पल पल कोलकाता के पूजा की सारी रीति दिल्ली एनसीआर  में ही निभाने के लिए प्रयासरत हूं ..

आश्ते बोछोर आबार होबे। मां तुमि आबार एशो….

(अगले साल फिर से होगा ,मां आप दोबारा आइएगा )

 

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