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मोईन कुरैशी केस के बारे में जाने सारी बातें, और क्यों प्रधानमंत्री पर सवाल उठ रहे हैं?

मामले पर ताजा अपडेट

सीबीआई (CBI) में घूसखोरी के आरोपों के बाद मचे घमासान के बीच सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा( Alok Verma) और स्पेशल डायरेक्टर राकेश (Rakesh Asthana) दोनों को छुट्टी पर भेज दिया गया है. साथ ही दोनों अधिकारियों के दफ्तर भी सील किए जा चुके हैं और अगले आदेशों तक सीबीआई का संचालन एम नागेश्वर राव करेंगे. ये सब फैसले मंगलवार की रात में सीवीसी की बैठक में लिए गए. आपको बता दें कि सीवीसी वही एजेंसी है जो भारत सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों से सम्बन्धित भ्रष्टाचार के केस की निगरानी करती है. आपको बता दें कि मामला शुरू भले ही मोइन कुरैशी से जुड़े कई मामलों से हुआ हो लेकिन अब उन मामलों की वजह से सीबीआई के भीतर चल रही दो सीनियर अधिकारियों की लड़ाई जग जाहिर हो गई है.

खैर, सीबीआई का जिम्मा मिलते ही एम नागेश्वर राव एक्शन में आ गए हैं. 1986 बैच के आईपीएस अफसर नागेश्वर ने राकेश अस्थाना पर लगे आरोप की जांच कर रही टीम के सदस्यों का तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर कर दिया . और नई टीम तैयार की है. बहरहाल अब दोनों सीबीआई के टॉप अफिसर छुट्टी पर हैं और इस मामले की जांच की जा रही है.

अब आखिर समझते हैं कि ये पूरा मामला शुरू कहां से हुआ जिसकी चपेट में बड़े-बड़े नाम आ गए. और कौन है वो मोईन कुरैशी जिसको पकड़ने के चक्कर में पूरी सीबीआई सवालों के घेरे में है.  

cbi

कौन है मोईन कुरैशी

-दरअसल, मोईन कुरैशी उत्तर प्रदेश के रामपुर का रहने वाला एक मीट कारोबारी है. कुरैशी ने मीट बेचने की शुरुआत साल 1993 में रामपुर से की फिर बूचड़खाना लगाया और देखते ही देखते मोइन कुरैशी मीट का बड़ा कारोबारी बन गया और वो देश-विदेश मीट एक्सपोर्ट करने लगा. आपको बता दें कि कुरैशी ऐसी दो दर्जन से ज्यादा कंपनियों का मालिक बन गया जो मीट एक्सपोर्ट करती थीं. कुरैशी की मुख्य कंपनी एएमक्यू एक्सपोर्ट है. मीट एक्सपोर्ट के अलावा मोइन की कंपनियां कंस्ट्रक्शन और फैशन क्षेत्र में भी उतर आईं. उसकी बेटी पर्निया फैशन से जुड़ी कंपनियों का कामकाज देखती थीं. वो फैशन डिजायनर और मॉडल है.

-बेटी के बारे में बताना ज़रूरी इसलिए है क्योंकि पहली बार कुरैशी जांच एजेंसियों के राडार पर तभी आया था जब 2011 में उसने बेटी की शादी खूब धूमधाम से की और उसमें पाकिस्तानी गायक राहत फतह अली खान को भी बुलाया. इस दौरान राहत फतह अली के पास 56 लाख विदेशी मुद्रा कैश पाए जाने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर तब जांच एजेंसियों ने हिरासत में ले लिया था. उस दौर में उस पर कांग्रेस के बड़े नेताओं से घनिष्‍ठ संबंधों के भी आरोप लगे.

-इसी बीच 2014 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने 15 फरवरी 2014 को दिल्ली, कानपुर, मुंबई समेत कुरैशी के पंद्रह ठिकानों पर रेड की. और कई मामले भी दर्ज किए गए.

– फिर साल 2015 में ईडी ने कुरैशी के खिलाफ विदेशी विनिमय प्रबंध कानून (FEMA) के तहत जांच शुरू की. और इसी दौरान ईडी के एक मामले में पहली बार सतीश सना का नाम कुरैशी के करीबी के रूप में सामने आया था. बता दें कि ये जांच आयकर विभाग द्वारा उपलब्ध कराए कुछ दस्तावेजों के आधार पर थी. कुरैश पर टैक्‍स धोखाधड़ी, मनी लांड्रिंग और धन के हेर-फेर के कई मामले उस पर दर्ज हैं.

Left-Alok Verma, Right- Rakesh Asthana

सीबीआई में मचा घमासान

अब यहां से शुरू होता है सीबीआई की पकड़ में मामला. बता दें मोईन कुरैशी के मामले की जांच राकेश अस्‍थाना की टीम ने की थी. और इसी मामले में हैदराबाद के कारोबारी सतीश ने कथित रूप से दावा किया कि उसने जांच से राहत पाने के लिए कथित रूप से रिश्‍वत दी.

यहां से ये समझना ज़रूरी है कि सीबीआई के नंबर 1 अधिकारी, डायरेक्ट आलोक वर्मा और नंबर 2 अधिकारी स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच की तल्खी अब सबके सामने आ गई है. दरअसल इस मामले की शुरुआत होती है 2017 से.

– जब 2017 में सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा ने पहली बार केंद्रीय सतर्कता आयोग यानी CVC के सामने अस्थाना के प्रमोशन को रोकने की मांग की. लेकिन CVC के साथ सुप्रीम कोर्ट ने भी अस्थाना को क्लीन चिट दे दी.

– फिर 2 जुलाई, 2018 को वर्मा ने CVC को लिख दिया कि अस्थाना भले ही एजेंसी में नंबर दो हों लेकिन मेरी गैर-मौजूदगी में वो बैठकों में हिस्सा नहीं ले सकते.

– मामला आगे बढ़ा तो राकेश अस्थाना ने पलटवार किया और सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा पर ही उलटा भ्रष्टाचार का आरोप लगा दिया. अस्थाना ने 24 अगस्त, 2018 को CVC और कैबिनेट सेक्रेटरी को शिकायत भेजी कि वर्मा खुद भ्रष्ट हैं और मोइन कुरैशी केस के आरोपी ने उन्हें 2 करोड़ की रिश्वत दी है.

– मामले ने तूल तब पकड़ा जब 4 अक्टूबर को कुरैशी केस में आरोपी सतीश सना ने कहा कि उन्होंने अस्थाना को 3 करोड़ की रिश्वत दी है.

मोईन कुरैशी

फिर होना क्या था इसके बाद सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा ने 15 अक्टूबर को राकेश के खिलाफ ही एफआईआर कर ली. इसमें अस्थाना पर मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े केस में जांच के घेरे में चल रहे कारोबारी सतीश सना से रिश्वत लेने का आरोप है. वहीं, ये एफआईआर होने के बाद राकेश अस्थाना ने आलोक वर्मा पर पलवाटर किया और साजिश का आरोप लगाया. अस्थाना ने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि सीबीआई और ईडी के कुछ अधिकारी उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं. मामला मीडिया में आया और आग की तरह फैल गया क्योंकि सीबीआई  कार्मिक मंत्रालय के अधीन आता है और इस मंत्रालय के प्रभारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं. तो ऐसे में न सिर्फ सीबीआई की फजीहत हो रही है बल्कि पीएम मोदी की भी किरकिरी हो रही है.

अब बात मौजूदा वक्त की करें, तो इस समय दोनों अधिकारी आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना छुट्टी पर भेज दिए गए हैं. वहीं एजेंसी की कमान संभालते ही नागेश्वर राव ने भी कार्रवाई करनी शुरू कर दी है. एजेंसी ने अपने 13 अफसरों का तत्काल प्रभाव से या तो ट्रांसफर कर दिया है या उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव कर दिया है. इनमें वो अधिकारी भी शामिल हैं, जो विशेष निदेशक राकेश अस्थाना पर लगे आरोपों की जांच कर रहे थे. 

सरकार का पक्ष

वहीं केंद्र सरकार ने भी सीबीआई के अधिकारियों की इस लड़ाई पर बुधवार को बयान दिया. मीडिया से रुबरू हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि CBI इस देश प्रतिष्ठित संस्था है. इसकी साख बनी रहे इसके लिए केन्द्र सरकार तत्पर है. उन्होंने कहा कि सीबीआई के इस मामले की जांच कौन करेगा ये केन्द्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और न ही सरकार इसकी जांच करेगी.

जेटली ने कहा कि हम सीबीआई के अधिकारियों में किसी को दोषी नहीं मान रहे हैं. कानून के मुताबिक जबतक जांच पूरी न हो इसलिए अधिकारियों को बाहर कर दिया गया है.

मीट के कारोबर से शुरू हुई इस कहानी में अब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई के दामन पर सवाल उठा दिए हैं. अगर जल्द इस मसले को हल न किया गया तो निष्पक्ष जांच से लोगों का भरोसा उठने में देर नहीं लगेगा.

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