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बर्थडे स्पेशल- पल-पल दिल के पास तुम रहते हो… किशोर कुमार

आवाज़ के जादूगर, कॉमेडी के सरताज और उनका मस्तमौला अंदाज हर किसी को एक पल में अपना मुरीद बना दे….हम बात कर रहें है मशहूर पार्श्व गायक किशोर कुमार की। किशोर कुमार को केवल गायक कहा जाए तो ये शायद उनकी कला व व्यक्तित्व के साथ न्याय ना होगा, किशोर कुमार को कला का भंडार कहा जा सकता है,वो जितने महान गायक थे उतनी ही बेज़ोड उनकी अभिनय कला थी,एक अभिनेता के रुप में वो हर किसी के दिल पर राज करने में कामयाब हुए, बात करें उनकी लेखन कला की तो उसका मुकाबला भी शायद ही कोई कर पाए, कंपोजर, पटकथा लेखक, निर्माता, निर्देशक हर भूमिका को उन्होंने बखूबी निभाया और शायद यहीं वजह है कि किशोर कुमार कुमार को इस दुनिया से गए 30 साल भले ही हो गए हो लेकिन हर हिंदुस्तानी के दिलों के बेहद करीब है वो…और उनका गाया गाना पल-पल दिल के पास आज उनके जन्मदिन पर उनको समर्पित है।

उनकी मधुर आवाज का जादू लोगों के सिर चढ़ कर बोला, और आज भी बोल रहा है। चार अगस्त, 1929 को जन्मे आभास कुमार ने फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान किशोर कुमार के नाम से बनाई। आज के इस दौर में किशोर कुमार के गाए हुए गीत जब रेडियो, टीवी, या पार्टी में बजते हैं तो लोग उस गाने को सुनकर मदहोश हो जाते हैं। किशोर के नगमों को सुनकर शायद ही कोई ऐसा हो जो खुद को थिरकने से रोक पाए। किशोर कुमार ने इन्दौर के क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई की थी। उनकी आदत थी कॉलेज की कैंटीन से उधार लेकर खुद भी खाना और दोस्तों को भी खिलाना। कहा जाता है कि किशोर कॉलेज के दिनों से ही काफी मजाकिया मिज़ा़ज के थे।

किशोर कुमार के फिल्मी करियर की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में साल 1946 में फिल्म ‘शिकारी’ से हुई। उन्हें पहली बार गाने का मौका 1948 में बनी फ़िल्म जिद्दी में मिली, जिसमें उन्होंने देव आनंद के लिए गाना गाया। किशोर कुमार के एल सहगल के ज़बरदस्त प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने यह गीत उन की शैली में ही गाया। जिद्दी की सफलता के बावजूद किशोर दा को न तो पहचान मिली और न कोई खास काम मिला। 1954 में उन्होंने बिमल राय निर्देशित फिल्म ‘नौकरी’ में एक बेरोज़गार युवक की संवेदनशील भूमिका निभाकर अपनी ज़बरदस्त अभिनय का परिचय दिया। इसके बाद 1955 में बनी “बाप रे बाप”, 1956 में “नई दिल्ली”, 1957 में “मि. मेरी” और “आशा” और 1958 में बनी “चलती का नाम गाड़ी” जैसी एक के बाद एक हिट फिल्में इंडस्ट्री को दी। किशोर कुमार 1970 से 1987 के बीच सबसे महंगे गायक हुआ करते थे, किशोर कुमार ने अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, जीतेन्द्र जैसे बड़े-बड़े दिग्गज कलाकारों के लिए आवाज दी थी।

किशोर कुमार अपने काम को लेकर जितने सुलझे थे उनकी निजी जिंदगी उतनी ही उलझी थी किशोर दा ने चार शादियां की थी उनकी दूसरी हमसफर अभिनेत्री मधुबाला थी,मजेदार बात ये है कि इंडस्ट्री में किशोर दा की पसंदीदा अभिनेत्री मधुबाला ही थी और किशोर दा ने कई फिल्मों में उनके साथ काम किया निजी जिंदगी हो या पर्दे पर दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। एक लड़की भीगी भागी सी, आइए मेहरबां, हाल कैसा है जनाब का जैसे कई हिट गानों ने इस जोड़ी को सबके दिलों में बसा दिया। किशोर कुमार के हुनर को कई बार सम्मानित किया गया, बतौर गायक 8 बार फिल्म फेयर पुरस्कार से किशोर दा को सम्मानित किया गया। सबसे पहले उन्हें 1969 में अराधना फिल्म के रूप तेरा मस्ताना गाने के लिए सर्वश्रेष्ठ गायक का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया था। 1978 में ‘डॉन’ के गीत ‘खाइके पान बनारस वाला’ के लिए भी फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया था।
कहा जाता है कि किशोर कुमार ने साल 1940 से साल 1980 के बीच के अपने करियर के दौरान करीब 574 से अधिक गाने गाए, इंडस्ट्री में उनका डंका बजता था और अपने करियर के दौरान कई कलाकारों को फिल्म जगत में स्थापित कर दिया। संगीत की दुनिया में किशोर कुमार एक ऐसा नाम है जिसे सब सलाम करते है इस महान कलाकार की बराबरी शायद ही कोई कर सकता है। आज भी उनके गाने जीवन के कई पहलुओं पर बिल्कुल सटीक बैठते है हर वर्ग के लिए हर रिश्तें के लिए किशोर दा ने गाने गाए भले ही किशोर दा आज हमारे बीच ना हो लेकिन उनके नगमें हर जुबा पर गीत बनकर हमेशा गुनगुनाए जाएंगे…

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