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‘अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस’: जानिए क्यों ज़रूरी है साक्षर होना, पढ़ेगा INDIA बढ़ेगा INDIA

आज 8 सितंबर है, वैसे तो आज के दिन इतिहास में बहुत कुछ हुआ है. जैसे… आज ही के दिन 8 सितंबर 1926 को पूर्वी भारत में असम राज्य के जाने माने गायक, कवि, गीतकार भुपेन हज़ारिका का जन्म हुआ था. जीती जागती मिसाल और सुरों की मल्लिका आशा भोंसले आज 8 सितंबर को अपना 85 वां जन्मदिन मना रही हैं. इतना ही नहीं आज ही के दिन 1960 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति फीरोज गांधी की मृत्यु भी हुई थी. बहरहाल इन सब के अलावा भी आज का दिन ख़ास है क्योंकि साल 1966 में यूनेस्को ने अशिक्षा को समाप्त करने के संकल्प के साथ ‘अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस’ की शुरुआत की थी. आईये बताते हैं ‘अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस’ के बारे में ज़रूरी बातें और हमारे देश में साक्षरता का हाल क्या है.

साल 1966 में United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization (यूनेस्को) ने शिक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने तथा विश्व भर के लोगों का इस तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए हर साल 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय/ विश्व साक्षरता दिवस मनाने का निर्णय लिया था. इससे पहले ‘अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस’ मनाने का विचार पहली बार ईरान के तेहरान में शिक्षा के मंत्रियों के विश्व सम्मेलन के दौरान साल 1965 में 8 से 19 सितंबर को चर्चा की गई थी. जिसके बाद से ये परंपरा लगातार जारी है और आज दुनियाभर में 52वां  ‘अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस’ मनाया जा रहा है.

क्यों जरूरी है अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस?

साक्षरता का मतलब केवल पढ़ना- लिखना या शिक्षित होना ही नहीं है. यह लोगों के अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े के अनुसार दुनियाभर में चार अरब लोग साक्षर हैं और आज भी 1 अरब लोग पढ़- लिख नहीं सकते. मानव विकास और समाज के लिए उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है. इस बात से पीछे नहीं हटा जा सकता है कि सफलता और जीने के लिए साक्षरता महत्वपूर्ण है.

बात हमारे प्यारे भारत की…

भारत अपनी बढ़ती आबादी से परेशान है. यहां संसाधनों की कमी नहीं है लेकिन सही ढंग से इस्तेमाल न होने और भ्रष्टाचार के कारण उन संसाधनों का लाभ उन लोगों तक नहीं पहुंच पाता जिन्हें मिलना चाहिए. यही कारण है कि भारत में साक्षरता की दर बेहद ख़राब है लेकिन समय के साथ चीजें बदल रही हैं. अभी के आंकडों के मुताबिक 2011 में भारत की साक्षरता दर 74.04% थी. वहीं मौजूद वक्त में ये 82 फीसदी से कम के अनुमान हैं. और राज्यों के अनुसार केरल में सबसे ज्यादा साक्षरता प्रतिशत 93.91 फीसदी और बिहार में सबसे कम 63.82 फीसदी बच्चे पढ़े लिखे हैं.

विद्यालयों की कमी, स्कूल में शौचालय आदि की कमी, जातिवाद, गरीबी, लड़कियों के साथ बलात्कार और छेड़छाड़ होने का डर,  जागरूकता की कमी. ये सब जरूरी चीजों को खत्म करने के लिए साक्षर होना हर किसी के लिए ज़रूरी है. जानकारी के मुताबिक दुनिया में 127 देशों में 101 देश ऐसे हैं. भारत अब बदल रहा है ब्रिटिश शासन के समय जो साक्षरता 12 फीसदी ही थी वो अब बढ़ रही है.

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