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देसी रिहाना- इस लड़की को सिर्फ ‘रिहाना’ जैसी लुक्स के कारण काम मिलता है…

BY-BHAWNA GUPTA

अक्सर हमारे देश में खूबसूरती को रंग से आंका जाता है। लड़कियों की खूबसूरती जांचने के लिए मापदंड बना दिए गए हैं, जिसमें गोरी लड़की को खूबसूरती का ताज पहना दिया जाता है और सांवली लड़की को खूबसूरती की कैटेगरी से बाहर कर दिया जाता है। इन्हीं मापदंडों को दरकिनार करने वाली छत्तीसगढ़ की रेने कुजुर को भारत की रिहाना कहा जाता है। हालांकि इस देसी रिहाना के लिए खुद को खूबसूरत साबित कर मॉडल बनने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था लेकिन आखिरकार इस लड़की ने खूबसूरती की गोरी टैगलाइन पर जोरदार तमाचा जड़ दिया है।

कुछ परियां काली भी होती हैं-

रेने कुजुर ने अपने बचपन का एक अनुभव एक मीडिया हाऊस को दिए इंटरव्यू में साझा किया। रेने ने बताया कि वो 3 साल की थी और हर आम बच्चे की तरह उसने भी फैंसी ड्रैस कॉम्पीटिशन में हिस्सा लिया था। इस प्रतियोगिता में रेने कुजुर परी बनकर स्टेज पर सबसे सामने आई, कई लोग उसे देखकर जोर से चिल्लाने लगे देखो काली परी और इसी के साथ उस नन्ही बच्ची के स्किनटोन का मज़ाक उड़ाते हुए पूरा ऑडिटोरियम ठहाके मारकर हंसने लगा।

आज उस घटना को गुज़रे करीब 20 साल हो गए हैं। रेने को आज तक को पूरा दृश्य याद है लेकिन इस लड़की ने खुद को पॉजीटिव रखते हुए एक बात कही कि कुछ परियां काली भी होती हैं।

रिहाना जैसी दिखती हैं रेने

रेने एकदम बारबेडियन पॉप स्टार रिहाना जैसी दिखती हैं। सोशल मीडिया पर रेने को भारत की रिहाना या देसी रिहाना कहकर बुलाते हैं। आप भी अगर दोनों की तस्वीरें मिला कर देखेंगे तो शायद असली नकली की पहचान नहीं कर पाएंगे। रेने का रंग-रुप, फीचर्स हु-ब-हु रिहाना से मिलते थे। चूंकि उनकी शक्ल एक पॉप स्टार से मिलती है तो उनको काम मिलने लगे। रेने ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया कि कैसे उन्हें देसी रिहाना होने का फायदा मिला। उन्होंने बताया कि एक बार उनके किसी दोस्त ने बिना मेकअप रेने की तस्वीरें खींची और कहा कि तुम रिहाना जैसी लगती हो। रेने ये सुनकर हंसने लगी लेकिन धीरे धीरे सिर्फ उनका दोस्त ही नहीं बल्कि हर कोई उन्हें रिहाना कहकर बुलाने लगा।

अगर रेने ‘रिहाना’ जैसे नहीं दिखती तो…?

हालांकि रेने कुजुर खुद का रिहाना जैसी दिखना किसी वरदान से कम नहीं मानती क्योंकि उन्हें रिहाना जैसे लुक्स के कारण ही काम मिलने लगा। मगर एक सवाल है जो बार बार मेरे मन को कचोट रहा है कि अगर वो रिहाना जैसे नहीं दिखती तो….?

हमारा समाज क्या एक काली मॉडल को स्वीकार करता? रेने को भारत की रिहाना की ख्याति प्राप्त होने से पहले सिर्फ अपनी स्किनटोन की वजह से काम नहीं दिया जाता था लेकिन जैसे ही लोगों को एक फेमस पॉप स्टार की लुक्स उसमें नज़र आई तो वो लड़की हर किसी को खूबसूरत लगने लगी, मॉडलिंग के ऑफर मिलने लगे, कुल मिलाकर रिहाना के टैग के कारण रेने के हालात सुधर गए।

जरुरी नहीं है कि हर काली लड़की की शक्ल किसी पॉप स्टार से मिलें तो क्या उनके साथ भेद-भाव यूं ही होता रहेगा? क्यों एक काली लड़की के नेचुरल स्कीन-टोन को छिपाया जाता है और गोरा करने के लिए मेक-अप की मोटी परत चढ़ा दी जाती है?

शुरु में हेमा मालिनी, रेखा और श्रीदेवी जैसी कितनी ही हीरोइन फिल्मों में अपने भारी शरीर और काले रंग के साथ आई थी, जिनको फिल्मों में अपने पैर जमाने के लिए गोरा होना पड़ा और शरीर से स्लिम होना पड़ा। लेकिन ऐसा क्यों….? क्या एक मोटी और काली लड़की खूबसूरत नहीं हो सकती?

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