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बर्थडे स्पेशल- राज कपूर के प्यार में आत्महत्या करना चाहती थी नरगिस

वो हंसता हुआ नूरानी चेहरा, संगमरमर सा तराशा बदन, वो कत्थई आंखें जिनसे ज़हानत झलकती थी। उनकी खिलखिलाती हुई हंसी काफी दिलकश थी। जब उनको पहली बार राज कपूर ने देखा ने तो बस एक टक लगाकर उन्हें देखते ही रह गए थे। उनकी नाजुक उंगलियों से ज़ुल्फों को सहेजना और फिर हाथों में लगा बेसन माथे से लिपट जाना, राज कपूर साहब के ज़हन में कुछ इस कद्र बस गया था कि 27 साल बाद फिल्म बॉबी में ऋषि कपूर और डिंपल कपाडिया पर हुबूहु फिल्माया। वो अदाकारा जिसे देखकर सुनील दत्त् अपने होश गंवा बैठे थे। आज उसी अदाकारा यानि नरगिस का जन्मदिन है।

बेहतरीन अदाकारा नरगिस

नरगिस एक ऐसी अदाकारा थी जिन्होंने अपनी बेहतरीन अदायगी और खूबसूरती से हर किरदार में जान फूंक दी। वो हर किरदार इतनी बखूबी निभाती थी कि लगता था जैसे अदाकारी में उन्होंने तालीम हासिल की हो। नरगिस जी में एक खासियत थी कि उन्होंने रिश्तों को बड़े शिद्दत से महसूस किया और बेहतरीन अदाकारा का ताज पहनकर इतराना उनकी कभी  फितरत नहीं थी। ये उनकी शख्सियत का बुनयादी पहलु था।

1 जून को जन्मदिन

नरगिस का यूं नाम  तो फातिमा राशिद था मगर नरगिस नाम से उन्हें सिनेमा में पहचान मिली। उनकी 1 जून,1929 की पैदाइश है और वो कोलकाता से ताल्लुक रखती हैं। उनके वालिद हिंदु और वालिदा मुस्लिम थी। अपने दौर में नरगिस की मां जद्दनबाई काफी मशहूर गायिका और नृतकी थी। नरगिस सिर्फ 6 साल की थी जब वो कला के पेशे में दाखिल हुई थी। फिल्म तलाश ए हक से उन्होंने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर फिल्मी सफर की शुरुआत की थी।

यूं हुई राज कपूर से मुलाकात

राज कपूर साहब जिनको खूबसूरती को परखने के लिए जाना जाता था। उन्हें अपनी पहली फिल्म आग के लिए एक स्टूडियो की तलाश थी, कहीं से मालूम हुआ कि नरगिस की वालिदा जद्दन बाई मशहूर स्टूडियो में रोमियो एंड जूलिएट की शूटिंग कर रही है तो बस वहीं देखने और बात करने के लिए राज कपूर वहां पहुंचे तो बाहर आई नरगिस, बेख्याली में जब उनके हाथ से बेसन माथे पर लगा तो राज कपूर उन पर फिदा हो गए। ये राज कपूर के लिए नरगिस का पहला दीदार था।

प्यार हुआ इकरार हुआ

इन दोनों की कहानी भी किसी फिल्म गीत की तरह थी जिसका सिलसिला शुरु हुआ था, जहां मैं जाती हूं पीछे चले आते हो, चोरी चोरी यूं मेरे दिल में समाते हो, कि ये तो बताओ तुम मेरे कौन कौन हो और प्यार हुआ इकरार हुआ पर आकर रुका। इश्क में डूबे राज कपूर और नरगिस बरसात की ठंडी फुहारों में भीगते हुए एक दूसरे के करीब तो आ रहे थे मगर बेखबर थे कि इस मोहब्बत का अंजाम क्या होगा। नरगिस पूरी तरीके से इस रिश्ते के लिए समर्पित हो चुकी थी, मगर राज कपूर साहब तो पहले से ही शादीशुदा थे।

जब मोरारजी देसाई के पास गई नरगिस

नरगिस इधर राज कपूर से निकाह के सपने देख कर ताउम्र उनके साथ ज़िंदगी बिताने को बेताब थी। मगर राज कपूर अपनी बीवी कृष्णा कपूर को नहीं छोड़ना चाहते थे। मोहब्बत में मदहोश नरगिस ने तो उस वक्त के मुंबई के गृह मंत्री मोरारजी देसाई से भी बात कर ली थी कि वो किस तरह कानूनी तौर पर राज कपूर से शादी कर सकती थी। मगर राज कपूर के ज़हन में ये शायद साफ था कि हिरोइन हिरोइन होती है और बीवी बीवी। मगर राज कपूर साहब ने एक बहुत ही संवेदनहीन बात कही कि मेरी बीवी मेरे बच्चों की मां है मगर नरगिस मेरी फिल्मों की मां है।

नरगिस जी राज कपूर के लिए इतना समर्पित थी कि जब भी आरके फिल्मस के खज़ाने में कोई कमी आती थी तो बाहर काम करके कमी पूरी करती थी यहां तक कि एक बार नरगिस ने राज कपूर के बुरे वक्त को उभारने के लिए अपने सोने के कंगन तक बेच दिए थे।

ऐसे मिला आरके स्टूडियोज को लोगो

दोनों ने एक साथ 16 फिल्में की, इनकी जोड़ी हिट थी। एक वाक्या मेरे ज़हन में आता है कि जब बरसात फिल्म रीलिज हुई थी तो इसके एक रोमांटिक सीन ने आरके फिल्म का बेहद मशहूर लोगो दिया था। जब राज कपूर साहब के हाथ में गिटार था तो खूबसूरत नरगिस उनकी बांहों में थी। नरगिस की पूरी ज़िंदगी राज कपूर और आरके स्टूडियोज के ही आज पास घूमती थी। मगर फिर एक मोड़ आया जब हर कोई कहने लगा था कि अब आरके स्टूडियोज में हीरो को ज्यादा तवज्जो मिलती है और हीरोइन सिर्फ नाचने गाने तक की ही सीमित रह गई है।

मोस्को में हुआ अहसास

नरगिस जब राज कपूर के साथ मोस्को गई तो उन्हें भी इस बात का अहसास हुआ कि उन्हें वहां कोई तवज्जो नहीं दी जा रही है। उनके आत्म सम्मान को काफी ठेस पहुंची और वो वहां से बीच में ही चली आई। अब नरगिस ये भी समझ गई थी कि जिसके लिए वो ज़िदंगी भर साथ रहने के ख्वाब बुन रही है वो राज कपूर उनसे कभी शादी नहीं करेंगे क्योंकि राज कपूर सबके सामने पहले ही ये साफ कह चुके थे कि वो अपनी बीवी को कभी नहीं छोड़ेगे। अब नगरिस ने उनसे दूरियां बढ़ाना शुरु कर दिया और बाहर की फिल्में भी साइन करना शुरु कर दिया।

मदर इंडिया

राज कपूर से दूर होने के बाद नरगिस की ज़िदंगी जैसे वीरान सी हो गई हो, वो गुम सुम रहने लगी, डिप्रेशन में चली गई। यहां तक की वो आत्महत्या करना चाहती थी। मगर किस्मत को शायद अपना रास्ता मालूम था और फिर आई मदर इंडिया जिन्होंने नरगिस को अमर कर दिया। उन्हें इसके लिए नेशनल अवार्ड से नवाजा गया। यही इसी मोड़ पर उनकी वीरान ज़िदगी में बहार बनकर आए सुनील दत्त।

नरगिस को देखकर नर्वस हुए सुनील दत्त

सुनील दत्त और नरगिस की कहानी भी ऐसी रही है कि जो आज-कल के आशिकों को काफी प्रेरित करती है। सुनील दत्त एक रेडियो स्टेशन में आर जे हुआ करते थे और नरगिस थी उस दौर की सबसे बड़ी अदाकाराओं में से एक। रेडियो की तरफ से उनको नगरिस का इंटरव्यू लेने भेजा गया मगर सुनील दत्त नरगिस को देखकर इतना नर्वस हो गए कि एक भी सवाल उनसे नहीं पूछ पाए। उनकी नौकरी जाते जाते बची।

मदर इंडिया के सेट पर आग

सुनील दत्त ने फिल्मों के लिए संघर्ष किया और इत्तेफाक से फिल्म मिली मदर इंडिया, हालांकि इस फिल्म में सुनील दत्त ने नरगिस के बेटे का रोल अदा किया था। सुनील दत्त की इस पहली फिल्म में नरगिस ने दत्त साहब को बहुत सपोर्ट किया। उनका ये सूफियाना सा रवैया सुनील दत्त के ज़हन में बस गया और उनसे मोहब्बत कर बैठे। कहते हैं शूटिंग के दौरान सेट में आग लग गई जिसमें नरगिस बुरी तरह फंस गई थीं, सुनील दत्त ने अपनी जान पर खेलकर नरगिस को बचा लिया।

आग की चिंगारी सिर्फ सेट पर नहीं बल्कि अब इन दोनों के भी सीने में लगने लगी थी। सुनील दत्त इस हादसे में घायल हो गए, तब नरगिस ने उनका बहुत ख्याल रखा। बड़ी हिम्मत करके सुनील दत्त ने नरगिस को शादी के लिए प्रपोज किया, इधर नरगिस ने भी दत्त को हां कह दी। इन दोनों ने 1958 में शादी कर ली।

नरगिस की ज़िदंगी में एक अनसुना पहलु ये भी है कि राज कपूर सुनील दत्त से शादी होने के बाद हररोज शराब पीकर आते और बाथटब में घंटों पड़े रहकर रोते थे। इधर, सुनील दत्त को नरगिस के अतीत की कोई परवाह नहीं थी और वो नरगिस को दिलों जान से चाहते थे।

शादी होने के बाद नरगिस से फिल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया और समाज सेवा करने लगी। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्हें 1980 में राज्यसभा के लिए भी नॉमिनेट किया गया था। हुकुमत-ए-हिंदुस्तान ने उन्हें पद्मश्री से भी नवाजा था। फिर उनकी तबीयत खराब रहने लगी थी। मालूम हुआ कि उन्हें कैंसर है, इलाज कराने के लिए वो अमेरिका गई।

सुनील दत्त को दी नरगिस को मारने की सलाह

उन्हें इतनी तकलीफ, इतना दर्द होता था कि खुद डॉक्टरों ने सुनील दत्त को सलाह दी कि उनका लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटा दें, मगर सुनील दत्त ने मना कर दिया और वो ज़िदंगी के आखिरी लम्हे तक उनके साथ रहे। वो कोमा में थी और कोमा से बाहर आकर वापिस इंडिया भी आ गई थी। मगर फिर कुछ पल ही जी पाई, 1981 में उनके बेटे संजय दत्त की पहली फिल्म रीलिज हुई जिसके देखने की नरगिस की बहुत ख्वाहिश थी मगर 8 मई को उनकी फिल्म रीलिज होने से पहले ही 3 मई को उनका इंतकाल हो गया।

आज वो भले ही हमारे बीच मौजूद नहीं है मगर अहसास, उनकी अदायगी हमेशा बीच कायम रहेगी।

 

 

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