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पंजाब के गुरतेज सिंह संधू ने बल्ब की खोज करने वाले थॉमस एडिसन का रिकॉर्ड तोड़ दिया

19 वीं सदी में जन्में महान अमेरिकन आविष्कारक थॉमस एल्वा एडिसन की खोज ने हर किसी की जिंदगी आसान बना दी, क्योंकि खोज भी एक ऐसी चीज की जो अंधेरा खत्म कर दे, और जिंदगी को रोशनी से भर दे यानी इलेक्ट्रिक बल्ब. बचपन में जब टीचर एडिसन के बारे में बताया करते थे तो कुछ भी दिमाग में घुसता ही नहीं था. लेकिन जैसे तैसे रट्टा मारकर याद कर ही लिया. लेकिन अब मन में सवाल आता है कि आखिर थॉमस एडिसन की बात की क्यों जा रही है. ज्यादा समय न ख़राब करते हुए माजरा समझाते हैं.

एडिसन का रिकॉर्ड तोड़ दिया…

आपकी स्क्रीन पर दो तस्वीरें दिख रही हैं. बायीं तरफ थॉमस एल्वा एडिसन की जो 11 फरवरी 1847 को जन्में और एक महान आविष्कारक होने के साथ-साथ एक सफल बिजनेसमैन हुए. ऐसे तो एडिसन के नाम फ़ोनोग़्राफ, फ़िल्म कैमरा और इलेक्ट्रिक लाईट जैसी 1,093 चीजें पेटेंट हैं जो उन्हें महान बनाती है. जिन्होंने इंसानी जिंदगी को बेहद सरल कर दिया. अब ख़बर के दूसरे और अहम हिस्से पर आते हैं स्क्रीन दायीं तरफ दिख रही तस्वीर में जो शख्स हैं उन्होंने ऐसा कारनाम कर दिखाया जिसने महान इंनवेंटर थॉमस एडिसन को भी पीछे छोड़ते हुए अपने नाम एडिसन से ज्यादा 1299 चीजें अपने नाम पेटेंट कर दी हैं. दरअसल फोटो में दिख रहे शख्स का नाम गुरतेज सिंह संधू है जो पंजाब के रहने वाले हैं. और संधू ने 1299 पेटैंट अपने नाम कर थॉमस एडिसन का रिकार्ड भी तोड़ दिया है.

पेटेंट करना यानी एक ऐसा कानूनी अधिकार जिसके मिलने के बाद यदि कोई व्यक्ति या संस्था किसी उत्पाद को खोजती या बनाती है तो उस उत्पाद को बनाने का एकाधिकार प्राप्त कर लेती है.

आईये बताते हैं कि आखिर कौन हैं गुरतेज सिंह संधू

गुरतेज सिंह संधू का जन्म लंदन में हुआ था. भारत में इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वह चैपल हिल की उत्तरी कैरोलिना यूनिवर्सिटी में भौतिक यानी फिजिकल विज्ञान में डॉक्टरेट की डिगरी हासिल करने के लिए चले गए. संधू को इंटीग्रेटेड सर्किट में रूचि रखते थे.

image credit: Idaho Statesman

उन की प्रतिभा और महनत को देखते हुए 1989 में उन्हें दो नौकरियों की पेशकश आई. उन्होंने अमेरिका  की सब से टॉप कंप्यूटर मेमोरी बनाने वाली उस समय की Texas Instruments को न जाते हुए Micron Technology का रुख किया. माइक्रोन बाजार में उस समय दूसरी कंपनियों से मुकाबला कर रही थी. उस समय माइक्रोन कंप्यूटर मेमोरी के नंबर में 18 पर थी. लेकिन इच्छा शक्ति और सप्षट इरादे से कंपनी टॉप की बनी. माइक्रोन के पास तकरीबन 40000 पेटैंट हैं. जिन में से 1299 अकेले गुरतेज सिंह संधू के नाम हैं.

तकनालोजी में संधू की महारत को देखते हुए उन को इलैक्ट्रिकल एंड इलैक्ट्रॉनिकस इंजीनियर्ज के इंस्टीट्यूट से 2018 के एंड्रयू एस ग्रोव अवार्ड के लिए नामज़द किया गया. बाकी विज्ञानियों को पछाड़ते हुए संधू ने यहां भी जीत के झंडे गाड़ दिए. और  इस अवार्ड पर कब्ज़ा कर अपनी प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया.

हालांकि खुद संधू कहते हैं कि एडिसन से उनकी तुलना को वो ठीक नहीं मानते. वो कहते हैं कि मेरी पेटेंट की हुई चीजों को मैं दूसरों इस्तेमाल करते हुए देखता हूं. इतना ही नहीं उनके शब्दों में उनकी महनत का फल यही है माइक्रोन में बैठ कर काम करना.

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