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Net Neutrality को सरकार की मंजूरी, इस तरह ग्राहकों को लूटने की तैयारी में थी कंपनियां

Net Neutrality को समझने का सबसे अच्छा उदाहरण थीम पार्क से मिल सकता है. ये कुछ ऐसा है कि आप किसी थीम पार्क का टिकट खरीदते हो, लेकिन टिकट खरीदने के बावजूद भी थीम पार्क में कुछ ऐसी एक्टिविटी या राइड्स होंगी जिसके लिए आपको अलग से चार्ज देना पड़ेगा. ये उदाहरण आसान है समझने के लिए.

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क्या है Net Neutrality?

सरकार ने बीते दिन Net Neutrality को मंजूरी दे दी है. इसके बाद अब इंटरनेट के लिए किसी से भी भेदभाव नहीं किया जाएगा. दरअसल देश कई महीनों से Net Neutrality को लेकर बेहस चल रही थी, लेकिन TRAI(Telecom Regulatory Authority of India) की सिफारिशों को सर्वोच्च बॉडी टेलिकॉम कमीशन ने मंजूरी दे दी, आम भाषा में कहे तो सरकार ने मंजूरी दे दी. दरअसल Net Neutrality का आसान भाषा में अर्थ है इंटरनेट पर आम आदमी हो या बड़ी कंपनी या फिर सरकार सबको बराबर मौका मिलना चाहिए.

सौ.गूगलइसके तहत अब हर किसी को ऑनलाइन बराबर एक्सेस मिलेगा और कोई भी भेदभाव नहीं किया जाएगा. लेकिन इसके अलावा कुछ क्षेत्रों को Net Neutrality से बाहर रखा गया है. इनमें Autonomous Driving, Tele-Medicine या Remote-Diagnostic Services  शामिल हैं. क्योंकि ये इमरजेंसी सेवा हैं इसलिए इन सर्विसेज को इस्तेमाल करने के लिए मौजूदा इंटरनेट स्पीड से तेज इंटरनेट की जरूरत पड़ सकती है.

नियम तोड़ने पर हो सकता है जुर्माना

इस फैसले के बाद इंटरनेट सेक्टर में मोनोपोली रहने की संभावनाएं भी खत्म हो जाएंगी. क्योंकि यहां सबको बराबर का हक मिलेगा. इस बात का जानकारी देते हुए दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन ने कहा, ‘‘दूरसंचार आयोग ने ट्राई की सिफारिशों के आधार पर नेट न्यूट्रैलिटी को मंजूरी दे दी. Net Neutrality के बाद अगर कोई इस नियम को तोड़ता है तो वो उस पर जुर्माना भी लग सकता है. ये फ़ैसला मोबाइल ऑपरेटरों, इंटरनेट प्रोवाइडर्स, सोशल मीडिया कंपनियों सब पर लागू होगा.

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क्यों Net Neutrality का फैसला लिया गया?

दरअसल इंटरनेट पर की जाने वाली फ़ोन कॉल्स समेत कई और सेवाओं और विभिन्न वेबसाइटों पर विजिट करने के लिए टेलीकॉम कंपनियां अलग कीमत तय करने की कोशिशें कर चुकी हैं. कंपनियां इसके लिए वेब सर्फिंग से ज़्यादा दर पर कीमतें वसूलना चाहती थीं. जिसके बाद टेलीकॉम सेक्टर की नियामक एजेंसी ‘ट्राई’ ने आम लोगों से राय मांगी थी  और उसी आधार पर ये फैसला लिया गया. जानकारी हो कि जब देश में इस बात को लेकर बहस शुरू हुई थी तो एक आवाज में लोगों ने इसका विरोध किया था.

 

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