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गोवर्धन पूजा का महत्व और विधि,जानें यहां

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट नाम से भी जाना जाता हैं. पुरानी कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता हैं कि इस दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर गोकुलवासियों को भगवान इंद्र के प्रकोप से बचाया था. गोकुलवासी अच्छी फसल के लिए भगवान इंद्र को पूजा करते थे लेकिन भगवान कृष्ण ने गोकुलवासियों को समझाया की गोवर्धन पर्वत की उपजाऊ मिट्टी से ही हमें फल, अन्न, चारा, और अन्य कई चीजों का सुख प्राप्त होता हैं इसलिए हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए. जिसके चलते गोकुलवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा करना शुरू कर दिया. गोकुलवासियों द्वारा गोवर्धन पर्वत की पूजा से इंद्र देव ने अपमानित महसूस किया और अपने प्रकोप से पूरे गोकुल को मूसलाधार बारिश के साथ प्रकोपित कर दिया.

पूजा का शुभ मुहूर्त

सुबह 6 बजकर 42 मिनट से 8 बजकर 51 मिनट तक
दोपहर 3 बजकर 18 मिनट से शाम 5 बजकर 27 मिनट तक

गोवर्धन पूजा कैसे करें-

गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं.

भगवान को खुश करने के लिए सुबह 5 बजे उठकर स्नान करें, पूरे शरीर पर तेल मलें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूरे घर को शुद्धिकरण कर लें और फिर पूजा के लिए तैयार हो जाए.

घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर उसे फूल और पेड़ो की शाखाओं से सजाए और पूजा करें.

भगवान गिरिराज के समक्ष घी का दिया जलाए फिर उसके बीचों-बीच परिक्रमा करें.

भगवान गिरिराज को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट और छप्पन भोग का भोग कराएं.

 

Infotainment Desk

 

 

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