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क्रिकेट की दुनिया से राजनीति की पिच पर शतक लगाने की तैयारी में सौरभ गांगुली….

सौरभ गांगुली भारतीय क्रिकेट टीम के एक सफल कप्तान के रुप में शामिल है. कुछ लोग भले ही ये कहें कि सौरभ गांगुली उछाल वाली पिच पर नहीं खेल सकते या फिर शॉर्ट पिच गेंदों के सामने झुक जाते थे. लेकिन इतना तो सच है कि सौरभ गांगुली भारत के उन कप्तानों में से एक जिन्होंने भारतीय टीम को एक मुकाम दिया.

वनडे और टेस्ट मैच की शुरुआत….

सौरभ गांगुली ने अपना पहला वनडे मैच 1992 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेला जबकि 1996 में अपना पहला टेस्ट मैच  इंग्लैंड के खिलाफ खेला था. दाद और प्रिंस ऑफ़ कोलकाता के नाम से चर्चित गांगुली वनडे मैच में अपनी आक्रमक बल्लेबाज़ी के कारण ज़्यादा चर्चित हुए. 

क्रिकेट के युग में सलामी बल्लेबाज़ के रूप में गांगुली ने कई धमाकेदार पारियाँ खेलीं. कप्तान के रूप में सौरभ गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाई दी. पांच साल 2000 से 2005 तक वो भारतीय टीम के कप्तान रहे. उन्होंने साल 2003 के विश्व कप में भारतीय टीम की कप्तानी की और भारतीय टीम फ़ाइनल तक पहुँची. 

सौरभ की कप्तानी में भारतीय टीम सबसे ज्यादा टेस्ट मैच जीती. लेकिन 2006 में उनको टीम से निकाल दिया गया. लेकिन घरेलू क्रिकेट में कई उपयोगी पारियाँ खेलकर सौरभ गांगुली ने भारतीय टीम में वापसी की. उन्होंने टेस्ट टीम के अलावा वनडे टीम में भी अपनी जगह पक्की कर ली है. 

बाएँ हाथ के बल्लेबाज़ सौरभ गांगुली ने टेस्ट क्रिकेट में देरी के क़दम रखा इसके बावजूद अपने पहले ही टेस्ट में शतक लगाकर सौरभ गांगुली ने शानदार शुरुआत की. एक बार राहुल द्रविड़ ने कहा था- अगर ऑफ़ साइड का कोई भगवान है, तो वो हैं सौरभ गांगुली. 

1999 का विश्व कप कौन भूल सकता है. श्रीलंका के ख़िलाफ़ सौरभ की 183 रनों की पारी.  विश्व कप में किसी भी भारतीय खिलाड़ी का यह सर्वोच्च स्कोर है. गांगुली कोच ग्रेग चैपल के साथ विवादों के कारण भी चर्चित रहे. हालाँकि अब सारे विवादों को छोड़ वे नए सिरे से अपना करियर बनाने में लगे हैं.

राजनीति का सफल…..

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की (बीजेपी) में शामिल होने की खबरें काफी वायरल हो रही हैं.कुछ समय पहले एक पोस्ट के जारिए लोगो को इस बात की जानकारि दी गई थी.. इस पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा, ”पूर्व कप्तान सौरव गांगुली बीजेपी में शामिल हुए हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ सबका विकास’ एजेंडे का साथ दिया है. इसलिए आज का दिन सेलिब्रेशन का है.” ‘प्रिंस ऑफ बंगाल’ गांगुली से बंगाल के लोग काफी प्रभावित होते हैं. बंगाल के सारी सतारुढ़ पार्टियों ने अपने पॉलिटिकल एजेंडे को ध्यान में रखते हुए गांगुली को अपने पार्टी में शामिल करने की काफी जद्दोजहद की है. 

2014 में गांगुली को मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले बीजेपी की तरफ से लोकसभा चुनाव लड़ने की पेशकश की गई थी. जिसके बाद वो चर्चा में भी आए के गांगुली को पीएम मोदी भारत के खेल मंत्री बनाने की चाहत में हैं। बहरहाल, गांगुली ने हमेशा से ही राजनीति में जाने की बात को नकारा है। उन्होंने हमेशा अपनेआप को राजनीति से दूर रखने की कोशिश की है। 

 

 

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