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बॉक्स ऑफिस पर उतरी फिल्म फन्ने खां-जानें रिव्यु

इस हफ्ते रिलीज़ हुई ऐश्वर्या राय बच्चन ,अनिल कपूर और राजकुमार राव की उम्मीदों ,सपनों और रिश्तों के बीच तैयार हुई कहानी फिल्म फन्ने खां। ये कहानी है एक ऐसे पिता की जिसकी बेटी को वो देश का अगला सिंगिंग स्टार बनाने का सपना देखता है और उसे एक बड़ा प्लेटफार्म देने के लिए वो कोई भी हद पार कर सकता है।

 

सुपरस्टार सिंगर बनने का सपना देखने वाला प्रशांत शर्मा यानी अनिल कपूर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच फन्ने खां नाम से मशहूर है और अपने सपने को पूरा करने के लिए वो जी तोड़ मेहनत करता दिखता है। वो भगवान के जगह भी सुपरस्टार शम्मी कपूर को पूजता दिखाई देता है और उसे देखकर ऐसा लगेगा जैसे वो संगीत और और स्टारडम के अलावा कुछ और सोचता ही नहीं है। लेकिन वो अपने ये सपने पूरा नहीं कर पाता मगर उसकी ये उम्मीद बंध जाती है उसकी बेटी से जिसका नाम भी उसने लता रखा। उसकी बेटी अच्छा गाती है और अच्छा डांस भी करती है मगर अपने भारी शरीर के कारण उसे ताने सुनने पड़ते हैं।

प्रशांत इस चक्कर में अपनी ही बेटी से बहुत खरी खोटी भी सुनता है। यहां अनिल कपूर ने मुंबई में रह रहे एक मिडिल क्लास व्यक्ति का किरदार बहुत अच्छे से निभाया है जो अपने सपने और हकीकत के बीच जूझता दिखाई देता है। इस फिल्म से डेब्यू कर रही पीहू अनिल कपूर के बेटी के किरदार में काफी सेंसिटिव लगी। खूबसूरत गायिका बेबी सिंह यानी ऐश्वर्या इस फिल्म में काफी ग्लैमरस दिख रही हैं। टैलेंटेड एक्टर राजकुमार राव इस फिल्म में अनिल कपूर के दोस्त बने हैं।

सेकंड हाफ में फिल्म की कहानी थोड़ी सी कही खोती हुई दिखती है। बेबी सिंह की कोई बैकस्टोइरी नहीं दिखाई गयी बस एक मैनेजर जो बेबी सिंह के खिलाफ साज़िश सोचता है और चाहता है की किसी भी फंक्शन पर बेबी सिंह किसी वार्डरॉब मालफंक्शन का शिकार बन जाए। सेकंड हाफ थोड़ा लम्बा और खींचा हुआ सा लगता है।


फिल्म के साउंडट्रैक्स कुछ ख़ास नहीं लगे। सुनिधि चौहान की आवाज़ में मोहब्बत गाना ही सुनने लायक लगा। ये एक म्यूजिकल ड्रामा फिल्म रही जिसमें ये दिखाया गया की कैसे मां बाप अपने सपनों को अपने बच्चों में जीते है। फिल्म का बेस्ट पार्ट सिर्फ अनिल कपूर की एक्टिंग ही होगी जिसके लिए आपको फन्ने खां ज़रूर देखनी चाहिए।

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