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कर्नाटक: राजनीति में सब कुछ तो बीजेपी का है!

कर्नाटक

कर्नाटक चुनाव के त्रिशंकु परिणाम आने के बाद कांग्रेस ने जहां अपनी पार्टी की सरकार बनाने लिए पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं बीजेपी भी सरकार बनाने के लिए मछली की तरह तड़प रही है और हर संभव कोशिश करने में लगी हुई है। हांलाकि, बीजेपी मुख्यमंत्री के उम्मीदवार बी. एस. येदियुरप्पा ने दावा ठोकते हुए कहा है कि, वो गुरुवार को मुख्यमंत्री  की पद की शपथ ग्रहण करेंगे। हांलाकि, अभी तक गेंद राज्यपाल वजुभाई वाला के पाले में ही है।

वहीं बीजेपी का कहना है कि राज्यपाल वजुभाई वाला बीजेपी को मेंडिडेट के आधार पर सरकार बनाने का निमंत्रण दे सकते हैं और यही नैतिकता है। अब सवाल उठता है कि, जिस नैतिकता की बात बीजेपी फिलहाल कर रही है वो नैतिकता मणिपुर और गोवा में कहां गई थी। जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन राज्यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दिया था।

वहीं अगर बात कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई की करें तो, वजुभाई भारतीय जनता पार्टी के नेता रह चुके हैं। गुजरात सरकार में वो 1997 से 2012 तक कैबिनेट मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। बीजेपी सरकार में उन्हें गुजरात का वित्त मंत्री भी बनाया गया था। वजुभाई राजकोट पश्चिमी से विधायक चुने जाते थे। इसके अलावा जब पहली बार नरेंद्र मोदी को विधानसभा चुनाव लड़ना था तब उन्होंने राजकोट की अपनी सीट खाली कर दी थी और मोदी वहां से पहली बार चुनाव जीते थे। 2014 में केंद्र में बीजेपी सरकार बनने और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद वजुभाई वाला को इनाम के तौर पर कर्नाटक का राज्यपाल पद मिला।

ऐसे में साफ तौर पर अनुमान लगाया जा सकता है, कि राज्यपाल का निर्णय क्या हो सकता है। हांलाकि कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने अपने एक बयान में स्पष्ट कर दिया है राज्यपाल उनको सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं देते तो वो सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।

अब राज्यपाल का आखिरी फैसले को देखना बड़ा दिलचस्प होगा।