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ढेर सारे कानून होने के बाद भी महिलाओं के प्रति छेड़छाड़ और रेप के ये आंकड़े भयानक है

भारत… इस शब्द के कई मायने हैं कई अर्थ हैं. यहां हर रंग के लोग मिल जाएंगे. यहां की धरती में धार्मिकता बसी है. यहां महिलाओं को देवी की तरह पूजा जाता है. यहां मासूम कन्याओं को देवी कहा जाता है. जब इस देश में महिलाओं के इतना ज्यादा मान-सम्मान की बात कही जाती है फिर क्यों यहां हैवानियत का नंगा नाच घर से लेकर बाजार तक रहता है. आखिर क्यों यहां महिलाएं सुरक्षित नहीं है जब लड़कियों को लक्ष्मी कहा जाता है तो क्यों यहां लड़कियों, बच्चियों, महिलाओं से छेड़छाड़, रेप, न जाने क्या क्या कर दिया जाता है.

इसका असल कारण हमारे और आपमें छुपा है, महिलाओं के कपड़ों से लेकर रहने के तरीके पर हमारे समाज के लोगों ने जिस तरह से पहरा दिया है वो हमारे समाज पर धब्बा है. हैवानियत कैसे किसी पर इस हद तक हावी हो जाती है कि उसको ये तो नहीं मालूम होता कि छेड़छाड़ की पीड़िता उसकी बेटी, बहन, बीवी, दोस्त, मां कोई भी हो सकती है. इन घिनौनी वारदातों के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं और सवाल खड़े करते जा रहे हैं कि बदलते वक्त में हमारा समाज किस ओर जा रहा है.

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हमारे देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध से निपटने तथा उन्हें सशक्त बनाने के लिए कई सारे कानून हैं जैसे दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961, गर्भाधारण पूर्व लिंग-चयन प्रतिषेध अधिनियम 1994, सती निषेध अधिनियम 1987, राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध, प्रतितोष) अधिनियम 2013 प्रमुख हैं. इसके अलावा भी ढेर सारे कानून है जो महिलाओं के हित में हैं लेकिन बावजूद इसके महिलाओं के प्रति न तो लोगों की सोच बदल रही है और न नही अपराध. जिसके कारण छेड़छाड़, बलात्कार, यातनाएं, अनैतिक व्यापार, दहेज मृत्यु तथा यौन उत्पीड़न जैसे मामले बढ़ते ही जा रहे हैं.

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क्या कहते हैं आंकड़े?

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट बताती हैः पूरे देश में

– 2017 में बलात्कार के कुल 28,947 मामले दर्ज किये गये.

– 2016 में बलात्कार के कुल 38,947 मामले दर्ज किए गये.

– 2012 बलात्कार के कुल 24923 मामले दर्ज किए गये.

– 2009 में बलात्कार के कुल 21397 मामले दर्ज किए गये.

– 2004 में बलात्कार के कुल 18233 मामले दर्ज किए गये.

राजधानी दिल्ली में महिलाओं के प्रति अपराध की संख्या

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक देश की राजधानी में पिछले साल हर दिन बलात्कार के औसतन पांच से अधिक मामले दर्ज किए गए. पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में बलात्कार के 2049 मामले दर्ज किए गए जो 2016 में 2064 थे. साल 2017  में छेड़छाड़ के 3273 मामले दर्ज किए गए. इसके मुताबिक फब्तियां कसने के मामलों में कमी दर्ज की गई. 2016 में 894 मामले दर्ज किए गए थे जबकि पिछले साल 621 मामले दर्ज किए गए.

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बहरहाल ये सिर्फ वो आंकड़े हैं जो दर्ज किये गए, लेकिन इसके अलावा ऐसे हजारों केस होंगे जो दर्ज ही नहीं होते. इन सब के लिए कौन जिम्मेदार है, वो पुलिसकर्मी जिसने अपना काम जिम्मेदारी से नहीं किया. वो कानून जिसकी बदौलत ये दरिंदे अपराध कर छूट जाते हैं. वो माता-पिता जिन्होंने अपने लाल की करतूतों पर ध्यान  नहीं दिया. या फिर वो समाज जहां आज हम रहते हैं. जय माता दी यहां कहीं भी किसी भी वक्त सुनने को मिल जाएगा, लेकिन वो वक्त कब आएगा जब मां, बहन, बेटी, सभी महिलाएं सुरक्षित होंगी और इन तीन शब्दों का अर्थ सही में मायने रखेगा. 

 

 

 

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