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राजनीति के अलग-अलग रंग,कभी आपके बिना कभी आपके संग

रोज़ी फौगाट का व्यंग:-

रामनवमी पर सांप्रदायिक दंगों की आंच में झुलस जाते हैं बिहार और बंगाल ….पूरे 6 दिन बाद, हनुमान जयंति पर मुहूर्त निकलता है मरहम का….जब बिहार में नीतिश कुमार दरगाह में सज़दा करते हैं और उत्तर प्रदेश में मोहसिन रज़ा मंदिर में लाल सिंदूर चढा हनुमान लला को प्रसन्न करते हैं….ख़ास बात ये कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी लगभग उसी TIMELINE में (आसनसोल में) अमन-चैन की बात करते हैं….ये भारत के सौहार्द की सच्ची तस्वीर होती तो बात ही क्या थी…लेकिन शुक्रिया है सियासत को…. भले दिखावटी ही सही, SECULARISM का पाठ तो य़ाद कर लेती है…फिर भी लगता है कि पूरे देशभर में राजनीति

कितने PREDICTABLE अंदाज में अग्रसर है…सत्ता-विपक्ष कितने COORDINATED दिखते हैं…….सब कुछ COINCIDENTLY साथ-साथ ही हो जाता है……BOLLYWOOD  अंदाज़ में उसी पटकथा पर ना जाने कितने ही BLOCK-BUSTURE दे जाती है……यहां एक SUPERHIT गाना याद आता है शायद जिसकी तर्ज पर ये POLITICAL DANCE हो रहा है…हम दोनो हैं अलग-अलग,हम दोनो हैं जुदा-जुदा रहते हैं,हम कभी-कभी एक-दुजे से ख़फा-ख़फा ‘कुर्सी’ देखी…मुंह मे सीटी बजे हाथ से ताली…. .मैं खिलाड़ी,तू अनाड़ी….. पर आप ज़रा चौकन्ना हो जाए…यहां कोई अनाड़ी नहीं हैं सब खिलाड़ियों के खिलाड़ी हैं…..ये 2019 के शतरंज की बिसात है…इन सब उस्तादों में अनाड़ी सिर्फ जनता है. हालांकि ये अनाड़ी उस जिंदा कौम की तरह है जिसके बारे में लौह पुरुष राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि जिंदा कौमें 5 साल तक इंतजार नहीं करती. खैर राजनीति है तो चुनाव हैं,चुनाव हैं तो मुद्दे हैं,मुद्दे हैं तो सोच है, सोच है तो फैसला है और फैसला है तो आम आदमी है…चलिए छोड़िए…just enjoy the summer season.