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दिल्ली सरकार चलाएगी “मिशन बुनियाद” योजना : सिसोदिया

दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार ने राज्य और नगरपालिका के स्कूल के बच्चों के लिए एक नई योजना शुरु की है. ये योजना तीसरे कक्षा से नौवी कक्षा तक के छात्रों के लिए है दिल्ली सरकार बच्चों की बुनियाद को मजबूत करने के लिए “मिशन बुनियाद” योजना चलाएगी.  सरकार को उम्मीद है कि इससे पढ़ाई-लिखाई में कमजोर बच्चों को योग्य बनाने में मदद मिलेगी. उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को इसकी घोषणा की.  इस मिशन के माध्यम से दिल्ली सरकार ने 3 महीने के भीतर राज्य में तीसरी से नौवीं कक्षा तक के सभी छात्रो को पढ़ने-लिखने और सामान्य मैथ्स की शिक्षा देने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

क्या है “मिशन बुनियाद”

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई-लिखाई में कमजोर बच्चों के लिए अप्रैल, मई और जून में मिशन बुनियाद चलाया जाएगा. यह मिशन तीसरी क्लास से लेकर 8वीं क्लास तक के बच्चों के लिए होगा। इसमें दिल्ली सरकार के अलावा स्थानीय निकायों के स्कूलों में पढऩे वाले बच्चे भी शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि देशभर में पढ़ाई को लेकर एक बड़ी समस्या है.  बच्चे अपने क्लास की किताब तक नही पढ़ पा रहे हैं या गणित के सवाल हल नही कर पाते हैं.

दिल्ली और देश के हर राज्य में 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे रीडिंग और गणित में कमजोर हैं. ऐसे में जो बच्चे पाठ्य पुस्तक नही पढ़ पा रहे हैं या गणित हल नही कर पा रहे हैं उन्हें बेहतर करना है.  उन्होंने इस मुद्दे पर एमसीडी और अन्य स्थानीय निकायों से मिलकर काम करने की अपील की है.

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार नगर निगम के स्कूलों के लिए भी मेंटर शिक्षक नियुक्त करेगी . इन शिक्षकों का काम स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को ट्रेनिंग देना होगा. सरकार ने पांच स्कूलों पर एक मेंटर शिक्षक को नियुक्त किया था. इसी तर्ज पर नगर निगम के स्कूलों में भी मेंटर टीचर लगाए जाएंगे. ये मेंटर टीचर बच्चों की व्यक्तिगत रिपोर्ट तैयार करेंगे. विशेष कक्षा के जरिए उनके स्तर में सुधार लाया जाएगा.

दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में बुधवार को इस मिशन की शुरुआत करते हुए शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा  कि मिशन बुनियाद को सकारात्मक रूप से पूरा करना होगा, क्योंकि पैरंट्स और बच्चों को यह हीन भावना आ रही है कि पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से वे इसका हिस्सा हैं.  इस हीन भावना के साथ बुनियाद नहीं रखी जा सकती. इसे सकारात्मक बनाना जरूरी है, क्योंकि पांच साल के बाद भी बच्चे को पढ़ना-लिखना नहीं आ रहा है तो उसमें पूरा एजुकेशन सिस्टम भी जिम्मेदार है.

 

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