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चाणक्य की नीति…. इन लोगों पर कभी ना करें भरोसा….

जिंदगी विश्वास और भरोसे पर ही चलती है. हमारे आसपास कई लोग होते हैं, जिन पर हम विश्वास करते हैं. इंसानों के साथ ही कई अन्य जीव भी है जिन पर हम विश्वास रखते हैं. लेकिन जीवन को सुखमय बनाने के लिए हमें किन-किन पर भरेसा करना चाहिए.. तो चलिए जानते है किन पर ना करें कभी भुलकर भी भरोसा …..

आचार्य चाणक्य कहते हैं-

नदीनां शस्त्रपाणीनां नखीनां श्रृंगीणां तथा।
विश्वासो नैव कर्तव्य: स्त्रीषु राजकुलेषु च।।

इस संस्कृत श्लोक का अर्थ यही है कि हमें नदियों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। शस्त्रधारियों पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। जिन जानवरों के नाखुन और सींग नुकिले होते हैं उन पर विश्वास करने वाले को जान का जोखिम बन सकता है। चंचल स्वभाव की स्त्रियों पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए। इनके साथ ही किसी राज्यकुल के व्यक्ति, शासन से संबंधित लोगों का भी भरोसा नहीं करना चाहिए।

जिन नदियों के पुल कच्चे होते हैं, उस नदी पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि किसी को नहीं पता की कब नदी के पानी का बहाव तेज हो जाए, उसकी दिशा बदल जाए. जिन जीवों के नाखुन और सिंग होते हैं उन पर भरोसा करना जानलेवा हो सकता है. क्योंकि ऐसे जीवों का कोई भरोसा नहीं होता कि वे कब बिगड़ जाए और नाखुन या सींगों से प्रहार कर दे. ठीक ऐसे ही अगर हमारे आसपास भी यदि कोई ऐसा व्यक्ति जो अपने साथ हथियर रखता है तो उस पर कभी भरोसा नहीं करना क्योंकि  जब भी उसको गुस्सा आएगा तब वो उस हथियार का उपयोग कर सकता है.

जिन लोगों का स्वभाव चंचल होता है उन पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए. जिन लोगों का संबंध शासन से है उन पर विश्वास करना नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि वे अपने स्वार्थ सिध्द करने के लिए कभी भी आपको धोका दे सकते हैं.

 

 

 

 

 

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