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तो क्या इस वजह से मोदी सरकार ने CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजा है?

मोदी सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को इसलिए छुट्टी पर भेजा है क्योंकि आलोक वर्मा ने राफेल पर सवाल उठाए थे. दरअसल, ये कहना है कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का, उन्होंने एक जनसभा के दौरान कहा कि ‘चौकीदार ने सीबीआई के डायरेक्टर को हटाया क्योंकि सीबीआई के डायरेक्टर ने राफेल पर सवाल उठाए थे.’

राजनीति में न पड़ते हुए सीधा मुद्दे पर आते हैं. इस बात में कोई शक नहीं कि इन दिनों सीबीआई सवालों के घेरे में है और इन्में कुछ ऐसे सवाल हैं जो शायद कभी न भुलाए जाएं. सीबीआई सवालों में है तो सरकार और प्रधानमंत्री पर भी उंगली उठती है क्योंकि सीबीआई खुद उस विभाग में आती है जिसके प्रधान, मोदी हैं. लेकिन क्या सच में मोदी सरकार ने राफेल के कारण ही आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजा है. इस सवाल का जवाब मिलता है उन मामलों को जानकर जिनकी जांच सीबीआई कर रही थी.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ बेहद महत्वपूर्ण मामले थे जो कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा द्वारा जांच प्रक्रिया में थे. इसमें सबसे मुख्य मामला है कथित राफेल सौदा घोटाला का, जी हां पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिंहा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस मामले को लेकर चार अक्टूबर को सीबीआई में 132 पेज का शिकायत पत्र सौंपा था, जिसे आलोक वर्मा ने स्वीकार किया था. इस शिकायत की सत्यापन प्रक्रिया एजेंसी के अंदर चल रही थी. दी वायर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस पर जल्द ही फैसला लिया जाना था.

इसके अलावा, एक और मामले की जांच सीबीआई कर रही है जिसमें प्रधानमंत्री के सचिव आईएएस अफसर भास्कर कुल्बे की कोयला खदानों के आवंटन में कथित भूमिका के आरोप हैं.

इतना ही नहीं, कुछ और भी ऐसे मामले हैं जिनकी जांच आलोक वर्मा के नेतृत्व में होनी थी, जिसमें मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया रिश्वत मामला, कोयला खदान आवंटन मामले में कथित रुप से आईएएस अधिकारी भास्कर कुल्बे की भूमिका से लेकर स्टर्लिंग बायोटेक शामिल है, जिसमें राकेश अस्थाना की कथित भूमिका की जांच की जानी थी.

वहीं पद से हटाकर छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले पर आलोक वर्मा ने इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है और शुक्रवार को इस पर सुनवाई होगी. वर्मा में अपनी याचिका में ये भी कहा है कि वे कुछ बेहद संवेदनशील मामलों की जांच प्रक्रिया में थे. कानूनी रुप से सीबीआई निदेशक को उनकी नियुक्ति से लेकर दो साल तक नहीं हटाया जा सकता है.

बहरहाल, सरकार की तरफ से कहना है कि आलोक वर्मा की छुट्टी सीवीसी की सिफारिशों पर की गई है. वहीं विपक्ष और वर्मा का कहना है कि सरकार का ये फैसला असंवैधानिक है.

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