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आज भाईदूज ,जानें मुहूर्त ,विधि और महत्व

भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है की इस दिन यमुना ने भाई यम को अपने घर बुलाकर उन्हें भोजन करवाया था और उनकी लंबी आयु के लिए व्रत किया था. यमुना भैया यम से मिलने के लिए बहुत व्याकुल थी और यम के दर्शन के बाद वो इतनी प्रसन्न हो गई की उन्होनें यम से वचन लिया की इस दिन हर भाई अपनी बहन से मिलने उनके घर जाए. यमुना के आवभगत से यम भी काफी प्रसन्न हुए और उन्होनें अपनी बहन यमुना को एक और वरदान दिया की इस दिन भाई-बहन यमुना नदी में स्नान करेंगे तो उन्हें मुक्ति प्राप्त होगी.

तभी से भाई दूज की परंपरा चली आ रही है जिसके चलते दूर रहने वाले भाई-बहन इस दिन एक-दूसरे से मिलते हैं. बहनें भाईयों की लंबी आयु के लिए यम भगवान की पूजा करती हैं और भाइयों को तिलक कर उनकी आवभगत करती हैं. इस दिन भाई-बहन द्वारा यमुना में स्नान करने का भी महत्व हैं.

भाई दूज का शुभ मुहूर्त:

शुभ मुहूर्त शुरू- दोपहर 1:10 मिनट
शुभ मुहूर्त समाप्त- दोपहर 3:27 मिनट

पूजा करने की विधि:

नहाने के बाद बहन आटे का एक चौक तैयार करें.

शुभ मुहूर्त के समय भाई को चौक पर बिठाकर उनके हाथों की पूजा करें.

हाथों की पूजा के लिए सबसे पहले हथेली पर चावल का घोल लगाए. फिर उसमें सिंदुर, पान, सुपारी और कद्दु के फूल रखकर पानी से क्रमश: तीन बार भाई के हाथों को धोएं.

फिर भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना हेतु इस मंत्र का जाप करें- गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें, फूले-फलें.

इन सबके बाद भाई को मीठा खिलाए और खुद भी मीठा खाएं.

शाम के समय यमराज के नाम का दीपक जलाए और उसे दक्षिण दिशा की ओर रखें.

इस दिन आसमान में उड़ती हुई चील की यह मान्यता है की बहन द्वारा भाई के लिए मांगी गई दुआ कबूल हो गई.

इस दिन बहन द्वारा भाई को भोजन अवश्य कराना चाहिए क्योंकि यमुना ने भी यम को भोजन करवाया था।

 

Infotainment Desk

 

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