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‘आदर्श बहू’ के अलावा ‘आदर्श पति’ बनाने का कोर्स भी शुरू करना चाहिए था!

जब बात बराबरी की आती है तो सबको समान हक़ मिलना चाहिए. हमारे समाज में बराबरी के नाम पर लड़के-लड़कियों के बीच जो भेद किया जाता है वो किसी से छिपा नहीं है. बचपन से ही लड़के को ज्यादा छूट देना इसका एक उदाहरण मात्र है. लेकिन बदलते समय के साथ बराबरी की परिभाषा में ज़रूर बदलाव आया है और लोग बेटे-बेटियों में भेद भी कम करते हैं, लेकिन बावजूद इसके कुछ ऐसी चीजें आज भी मौजूद हैं हमारे बीच जो सवाल करने पर मजबूर करती हैं. दरअसल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय है. इस विश्वविद्यालय ने एक ऐसा कोर्स शुरु किया है जिसने इसे ख़बर बना दिया है.

बरकतुल्ला खान विश्वविद्यालय
बरकतउल्ला खान विश्वविद्यालय

ये कोर्स कुछ और नहीं बल्कि तीन महीने में ‘संस्कारी बहू’ बनाने का है. सुनकर अजीब लगता है न? लगना भी चाहिए क्योंकि ये वही विश्वविद्यालय है जो ये निर्धारित नहीं कर पा रहा कि बीसीए स्टूडेंट्स अपनी परीक्षा हिंदी में देंगे या अंग्रेजी में. बहरहाल अपनी ख़बर पर आगे बढ़ते हैं. इस कोर्स को लेकर विश्वविद्यालय का मानना है कि ये महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम है. इस संबंध में वाइस चांसलर प्रफेसर डीसी गुप्ता ने बताया कि  ‘इसका मकसद लड़कियों को जागरूक करना है जिससे वे नए माहौल में आसानी से ढल सकें.’ प्रफेसर गुप्ता ने कहा, ‘एक विश्वविद्यालय के तौर पर हमारी समाज के प्रति भी कुछ जिम्मेदारियां हैं. हमारा मकसद ऐसी दुल्हनें तैयार करना है जो परिवारों को जोड़कर रखें.’

आर्दश बहू, प्रतीकात्मक तस्वीर

आपको बता दें कि यह सर्टिफिकेट कोर्स मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और महिला शिक्षा विभाग में पायलट प्रॉजेक्ट की तरह शुरू किया जाएगा. प्रशासन का कहना है कि हमारा उद्देश्य यह है कि कोर्स के बाद लड़की परिवार में होने वाले उतार-चढ़ाव को समझने के लिए तैयार रहे.’

इतना ही नहीं आदर्श बहू तैयार करने का तीन महीने का यह कोर्स अगले अकादमिक सत्र से शुरू किया जाएगा. हालांकि अभी ख़बर ये भी है कि कोर्स पूरा करने वाली लड़कियों के पैरंट्स से उनका फीडबैक भी लिया जाएगा. वीसी का कहना है कि इससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएंगे. बहरहाल आप क्या सोचते हैं अगर विश्वविद्यालय लगे हाथ आर्दश पति बनाने का कोर्स भी शुरु कर देता?

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