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अयोध्या विवाद पर सबसे अहम् सुनवाई आज, देश की टिकी कोर्ट पर नज़रें

अयोध्या विवाद

अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज (बुधवार)अहम सुनवाई होनी है। जानकारी हो कि, इस मामले में कोर्ट पहले ही साफ़ कर चुका है कि, कोर्ट इस मामले को आस्था नहीं बल्कि ज़मीन की नज़र से देखेगा। सुप्रीम कोर्ट की पीठ इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 13 अपीलों पर सुनवाई करेगी।

ग़ौरतलब है कि, इससे पहले 8 फ़रवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को दो हफ्ते में दस्तावेज तैयार करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही, कोर्ट ने यह साफ किया कि इस मामले में अब कोई नया पक्षाकार नहीं जुड़ेगा। आज जब इस मामले की सुनवाई है तो सभी काग़जी कार्रवाई और अनुवाद का काम पूरा हो गया है।

आपको बता दें कि इस मामले से जुड़े 9,000 पन्नों के दस्तावेज और 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियां पाली, फारसी, संस्कृत, अरबी सहित विभिन्न भाषाओं में हैं, जिस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से इन दस्तावेजों को अनुवाद कराने की मांग की थी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में तीन जजों की बेंच सुनवाई की दिशा तय करेगी।

वहीं इस मामले को लेकर श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष एवं मणिराम दास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि बुधवार से शुरू हो रहे रामजन्मभूमि विवाद की सुनवाई लगातार होनी चाहिए क्योंकि देश के सम्पूर्ण हिन्दू चाहता है कि अयोध्या में सौहार्दपूर्ण वातावरण में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बने। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के जन्मस्थल पर पूजा और पाठ नित्य हो रहा है केवल मंदिर को भव्यता देनी है।

बाबरी मस्जिद के पक्षकार मोहम्मद इकबाल ने कहा कि रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद की हो रही आज से उच्चतम नयायालय की सुनवाई अब निरंतर होनी चाहिए जिससे देश में सौहार्द का वातावरण बना रहे और इससे दोनों पक्ष राजनीति न कर सकें। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि फैसला मेरे हक में आयेगा और यह देश के लिए एक मिसाल कायम होगी।

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