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सीरिया में संदिग्ध गैस अटैक के बाद युद्ध में कूदा अमेरिका

सीरिया
सौ. गूगल

7 अप्रैल को सीरिया में हुए संदिग्ध जहरीली गैस अटैक के बाद अमेरिका ने भी बदला लेना शुरु कर दिया। अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर शनिवार को बड़ी कार्रवाई की है। इस बात की जानकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ही दी है। ट्रंप ने व्हाइट हाऊस से टीवी संबोधन में कहा, “कुछ देर पहले मैंने अमेरिका की सेनाओं को सीरिया के तानाशाह बशर अल-असद के रसायनिक हथियारों के ठिकानों पर हमले करने का आदेश दिया है।”
खबरों के मुताबिक करीब 30 मिसाइलें दागी गई हैं। अमेरिका की इस कार्रवाई का रूस ने विरोध किया है। बता दें कि सीरिया से पिछले कुछ समय में जब भी कथित केमिकल अटैल की खबरें आई हैं, अमेरिका ने उसपर हमला किया है। पिछले साल भी अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सीरिया में केमिकल अटैक के खिलाफ हमले का आदेश दिया था।

 क्या है पूरा विवाद

बशर अल-असद ने 2000 में अपने पिता हाफेज़ अल असद की जगह ली थी। अरब के कई देशों में सत्ता के ख़िलाफ़ शुरू हुई बगावत से प्रेरित होकर मार्च 2011 में सीरिया के दक्षिणी शहर दाराआ में भी लोकतंत्र के समर्थन में आंदोलन शुरू हुआ था। सीरिया के राष्ट्रपति असद तानाशाह हैं। सीरिया की असद सरकार को यह असहमति रास नहीं आई और उसने आंदोलन को कुचलने के लिए क्रूरता दिखाई। सरकार के बल प्रयोग के ख़िलाफ़ सीरिया में राष्ट्रीय स्तर पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया और लोगों ने बशर अल-असद से इस्तीफे की मांग शुरू कर दी।

वक़्त के साथ आंदोलन लगातार तेज होता गया। विरोधियों ने हथियार उठा लिए. विरोधियों ने इन हथियारों से पहले अपनी रक्षा की और बाद में अपने इलाक़ों से सरकारी सुरक्षाबलों को निकालना शुरू किया।

असद ने इस विद्रोह को ‘विदेश समर्थित आतंकवाद’ करार दिया और इसे कुचलने का संकल्प लिया। उन्होंने फिर से देश में अपना नियंत्रण कायम करने की कवायद शुरू की। दूसरी तरफ विद्रोहियों का ग़ुस्सा थमा नहीं था। वे भी आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार रहे। इस वजह से दोनों पक्षों के बीच हिंसा लगातार बढ़ती गई।