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iPhone के वो किस्से जिन्हें आप यकीनन नहीं जानते होंगे

By- Bhawna Gupta

दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी Apple ने बुधवार रात 10:30 बजे (भारतीय समयानुसार) ऐप्पल के प्रोडक्ट्स को लॉन्च किया। कैलिफोर्निया के कूपर्टीनो में मौजूद ऐप्पल पार्क कैंपस में इवेंट के दौरान Apple iPhone XR, iPhone XS और iPhone XS Max को लॉन्च किया, इसके अलावा कंपनी ने अपनी स्मार्ट वॉच सीरिज़ 4 से भी पर्दा उठा लिया है।

नए लॉन्च हुए स्मार्टफोन की भारत में कीमतें-

Apple iPhone XR की कीमत भारत में 76,900 रुपये से शुरू होगी। यह दाम 64 जीबी वेरिएंट का है। भारत में iPhone XS की कीमत 99,900 रुपये से शुरू होती है। इस दाम में आपको 64 जीबी वेरिएंट मिलेगा। 256 जीबी वेरिएंट की कीमत 1,14,900 रुपये और 512 जीबी वेरिएंट की कीमत 1,34,900 रुपये है। iPhone XS Max के 64 जीबी वेरिएंट की कीमत 1,09,900 रुपये है। 256 जीबी वेरिएंट की कीमत 1,24,900 रुपये और 512 जीबी वेरिएंट की कीमत 1,44,900 रुपये है।

इसी के साथ कंपनी ने अपने पुराने वेरियंट्स iPhone SE, iPhone 6s और iPhone X को अमेरिका से स्टोर से हटा लिया है और iPhone 7 और iPhone 8 की कीमत में कटौती कर दी है। कंपनी जब भी अपना अनुअली Apple iPhone लॉन्च करती है तो पुराने हैंडसेट्स को स्टोर से हटा लेती है और कुछ की कीमतों में कटौती कर देती है। चलिए आज आपको कंपनी के बारे में कुछ ऐसे फैक्टस् या अनसुने किस्से बताते हैं जो शायद आप नहीं जानते-

कंपनी ने जब 11 साल पहले अपने पहला iPhone लॉन्च किया था, उस वक्त कोई आइडिया भी नहीं था कि आगे चलकर ये स्मार्टफोन लोगों का स्टेटस सिंबल बन जाएंगे और पूरी दुनिया पर राज करेंगे। कंपनी का पहला डिवाइस ऐसा था जो टचस्क्रीन था और 2जी नेटवर्क को सपोर्ट करता था। लेकिन कंपनी ने तय किया हुआ था कि हर साल फोन में बदलाव किए जाएंगे और नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशंस को जोड़ते हुए स्मार्टफोन लॉन्च किए जाएंगे।

तीन दोस्तों ने की थी शुरुआत

ऐप्पल की स्थापना साल 1976 में 1 अप्रैल को की गई थी जिसे सब फूल डे के नाम से मनाते हैं। तीन दोस्त यानि स्टीव जॉब्स, स्टीव वोजनियाक और रोनाल्ड वेन ने पर्सनल कंप्यूटर बनाने के लिए कंपनी की स्थापना की थी। 1 अप्रैल, 1976 को ही कंपनी ने अपना पहला पर्सनल कंप्यूटर लॉन्च किया था। धीरे धीरे कंपनी ने कंप्यूटर के अलावा दूसरे प्रोडक्ट जैसे आईफोन, आईपैड, मैक-मिनी, आई-पॉड, आई-ट्यून्स, स्मार्टवॉच और आईओएस भी लॉन्च किए।

कंपनी का नाम और लोगो

ऐसा कहा जाता है कि स्टीव जॉब्स को ऐप्पल सबसे ज्यादा पसंद थी और उनका अपना सेब का बगीचा था। इसीलिए कंपनी का नाम ऐप्पल रखा गया, इसके अलावा ये भी माना जाता है कि जॉब्स पहले अटारी नाम की कंपनी में काम करते थे और वो चाहते थे कि स्पेलिंग के कारण फोन बुक में अटारी से पहले उनकी कंपनी आए इसीलिए ऐप्पल नाम रखा गया। कंपनी बनाते समय उन्होंने नामों की लिस्ट देखी तो ऐप्पल का नाम सबसे ऊपर था।

आपने देखा ही होगा कि कि ऐप्पल के लोगो में सेब कटा हुआ है। उसका कारण है कि 1977 में जब डिजाइनर रॉब जेनॉफ ने इस लोगो को तैयार करने स्टीव जॉब्स के सामने पेश किया था तो स्टीव को एक ही नज़र में ये लोगो पसंद आ गया था। इस लोगो के बारे में बताया जाता है कि Logo कम्प्यूटर साइंस के विद्वान माने जाने वाले एलन टर्निंग की याद में बनाया गया है। एलन टर्निंग की 1954 में आचानक मौत हो गई थी। उनके शव के पास से एक जहरीला सेब मिला था, जिसको खाया हुआ था। बस इसी तरह कंपनी के लोगो को कटा हुआ सेब मिला, आज इस लोगो की अपनी ही एक अलग पहचान है।

क्या आपको पता है?

ऐप्पल कंपनी में आज 92,000 से भी ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं।ऐप्पल कंपनी में कोई कंप्यूटर के आसपास सिगरेट नहीं पी सकता नहीं तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अमेरिकी ट्रेजरी के पास जितना कैश है उसका दोगुना ऐप्पल के पास है। iPhone का कोड नंबर M68 है। जब भी टीम किसी नए प्रोजेक्ट पर काम करती है तो कंपनी की कारपेंटर की टीम कर्मचारियों के आसपास दीवार बनाने का काम करती है। साल 1983 में ऐप्पल ने lisa कंप्यूटर्स को लॉन्च किया था जो मार्केट में असफल हो गए थे जिसके कारण कंपनी ने 2700 कंप्यूटर्स को जला दिया था।

iPhone के कुछ दिलचस्प किस्से-

सीक्रेट ढंग से बनाया गया था iPhone

ऐप्पल के ऊपर टेक जर्नलिस्ट ब्रायन मर्चेंट ने ‘द वन डिवाइस: द सीक्रेट ऑफ द आईफोन’ के नाम से किताब लिखी थी। इस किताब में खुलासा किया गया है कि iPhone बनाने का आइडिया सिर्फ ऐप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स को ही पता था और उन्होंने इस आइडिया को किसी से भी शेयर नहीं किया। सबसे पहले उन्होंने एक टीम बनाई और एक शर्त पेश की कि इस टीम में कोई भी व्यक्ति कंपनी के बाहर का नहीं होगा।

बनाने वालों को ही नहीं पता था क्या बना रहे हैं

स्टीव जॉब्स ने जिस टीम को ये प्रोजेक्ट दिया था, उस टीम को भी नहीं पता था कि वो लोग आखिर क्या बना रहे हैं। स्टीव ने इस प्रोजेक्ट को प्रोजेक्ट पर्पल का नाम दिया और कूपरटिनो में प्रोजेक्ट के लिए एक बिल्डिंग खरीदी। प्रोजेक्ट में काम कारने वालों को बिल्डिंग से बाहर जाने की इजाज़त नहीं थी। इसका एक उद्देश्य था कि किसी को भी कुछ न पता चलें कि बिल्डिंग में क्या चल रहा है। 3 साल की मेहनत के बाद आखिरकार कंपनी का प्रोडेक्ट तैयार हुआ और 29 जून 2007 को दुनिया ने पहला iPhone  देखा।

नशे में थे इंजीनियर्स

9 जनवरी 2007 को जब स्टीव जॉब्स सेन फ्रांसिस्को के मॉस्कॉन सेंटर में दुनिया का पहला आईफोन लॉन्च कर रहे थे उस समय एपल के इंजीनियर्स और मैनेजर्स नशे में धुत थे। वे ऑडियंस में बैठकर स्कॉच और विस्की पी रहे थे। न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, लॉन्च के समय इंजीनियर्स नर्वस और डरे हुए थे। क्योंकि जॉब्स स्टेज पर दुनिया के सामने पहला iPhone पेश कर रहे थे और अगर डिवाइस में कोई गड़बड़ी हुई या डेमो दिखाते समय फोन ठीक से परफॉर्म नहीं कर पाया तो बाद में उन्हें जॉब्स के गुस्से का शिकार होना पड़ेगा।

iPhone में थी कमियां

जब स्टीव जॉब्स ने स्टेज पर दुनिया के पहले iPhone को लॉन्च किया था तो उसमें काफी कमियां थी। जैसा स्टीव जॉब्स डिवाइस को चाहते थे, डेवलपर्स वैसा सेट उन्हें नहीं दे पाया थे। जिसके कारण स्टीव जॉब्स को काफी गुस्सा आया था और उन्होंने सॉफ्टवेयर टीम को दीवार में सिर मारने को कहा था। इसके बाद iPhone की सॉफ्टवेयर टीम तब तक ऐसे कमरे में बैठकर सॉफ्टवेयर बनाती रही जिसमें खिड़की भी नहीं थी। ऐसा तब तक चला जब तक कि जॉब्स को फोन में वे सभी फीचर्स नहीं मिल गए जिनकी उन्होंने कल्पना की थी।

कई डिजाइन रिजेक्ट होने के बाद बना iPhone का डिजाइन

किताब के मुताबिक जॉब्स एक ऐसा डिवाइस चाहते थे जो दिखने में काफी कूल लगे। कंपनी ने फोन का प्रारुप बनाने के लिए करीब 150 मिलियन जॉलर यानि 947 करोड़ 55 लाख रुपए खर्च किए थे। स्टीव जॉब्स के सामने कई फोन के प्रारुप पेश किए गए लेकिन उन्होंने हर किसी को रिजेक्ट कर दिया था। इसके बाद जॉब्स और एप्पल के डिजाइन गुरु जॉनी एल वे ने मिलकर एक ऐसा आईफोन बनाया जिसकी बॉडी एल्युमिनियम से बनी थी लेकिन बनने के बाद अहसास हुआ कि एल्युमिनियम बॉडी के साथ रेडिया फ्रिक्वेंसी पास नहीं हो सकेगी। इसके बाद कई डिजाइन्स को रिजेक्ट करने के बाद जॉब्स ने पहले आईफोन की डिजाइन को फाइनल किया था।

स्टीव ने फिश टैंक में फेंक दिया था iPod

ऐप्पल से जुड़ा एक और किस्सा है जब स्टीव जॉब्स ने नए बने iPod को फिश टैंक में फेंक दिया था। दरअसल, इंजीनियर्स ने बड़ी मेहनत के साथ जब iPod को तैयार करके जॉब्स के सामने पेश किया था तो जॉब्स ने नए बने iPod को फिश टैंक में फेंक दिया था। इंजीनियर्स ने चौंकते हुए कारण पूछा तो स्टीव ने बताया कि इसका वजन ज्यादा है और साइज़ भी बड़ा है। इंजीनियर्स ने उनको समझाना चाहा कि इससे छोटा iPod तैयार नहीं किया जा सकता तो स्टीव जॉब्स ने फिश टैंक की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इसमें से बुलबुले निकल रहे हैं यानि अभी भी इसमें जगह है और इसे छोटा बनाया जा सकता है।

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