Khabron se Hatkar

‘भानगढ़’ एक ऐसा भुतहा किला जहां रात को जो रुका वो वापस नहीं आया

पुराने.. उजड़े… और वीरान पड़े किलों का, मौत.. हादसों.. और रूहों से अलग ही संयोग जुड़ा है। ये खंडरनुमा किले अपने अंदर कई दर्दभरे और डरावने राज़ समेटे हुए है… जो आज भी उस अतीत की तड़पती हुई चीखों… अधूरी रह गई कहानियों और कई किस्सों को बयां करती है। दुनिया भर में कई ऐसे पुराने किले है जिनका अपना एक अलग ही काला अतीत है और वहां आज भी रूहों का वास है। लेकिन इन सारे पुराने किलों में सबसे डरावना भूतों का गढ़ कहा जाने वाला किला है भानगढ़।

भानगढ़……. एक ऐसा किला, जो एक शानदार बनावट के साथ-साथ अपने सीने में एक बेहतरीन अतीत भी छुपाए हुए है। ये अभिशाप ही है की कभी अपनी खूबसूरती पर इतराने वाला 500 साल पुराना महल आज एक भुता खण्डार के नाम से जाना जाता है। यहाँ रात होते ही जाग जाती हैं आत्माए… सूरज डूबते ही यहाँ रूहों का कब्‍जा हो जाता है और शुरू हो जाता है मौत का तांडव। यहाँ शाम होते ही तलवारों की टनकार और और पायल की झंकार सुनाई देती है… और सुनाई देता है सन्नाटे को चीरती हुई चीखे… एक अजीब सा शोर। इस किले के कमरों में रोने की आवाजें साफ सुनी जा सकती है। इस किले में जो भी सूर्यास्‍त के बाद गया वो कभी भी वापस नहीं आया है। और अगर लौटा तो वो इस लायक ही नहीं रहा की ज़िंदगी सुकून से गुज़ार सके…. इस किले में पहुंचने के बाद से ही वहां की फिजा में रहस्य और डर महसूस होने लगता है । आखिर क्या है इस किले सन्नाटे का सबब

राजस्थान के अलवर जिले में इस किले को आमेर के राजा भगवंत दास ने 1573 में बनवाया था। भगवंत दास के छोटे बेटे और मुगल शहंशाह अकबर के नवरत्नों में शामिल मानसिंह के भाई माधो सिंह ने बाद में इसे अपनी रिहाइश बना लिया। मुगलों के कमज़ोर पड़ने पर महाराजा सवाई जयसिंह ने इन्हें मारकर भानगढ़ पर कब्ज़ा कर लिया….

भानगढ़ के भुतहा और श्रापित होने के पीछे यु तो कई कहानिया मशहूर है लेकिन भानगढ़ की बर्बादी की वजह एक तांत्रिक को माना गया है कहा जाता है की भानगढ की राजकुमारी रत्‍नावती बहुत सुन्‍दर थी जि‍सके स्‍वयंवर की तैयारी चल रही थी लेकिन उसी राज्‍य मे एक सिंघि‍या नाम का तान्‍तरि‍क था जो राजकुमारी को पाना चाहता था… इसलि‍ए उसने राजकुमारी के श्रंगार के तेल को जादू से सम्‍मोहि‍त करने वाला बना दि‍या, राजकुमारी रत्‍नावती के हाथ से वो तेल एक चटटान पर गि‍रा तो वो चटटान तान्‍तरि‍क सिंघि‍या के उपर ही गि‍र गई लेकिन मरते मरते सिंघि‍या ने उस नगरी और राजकुमारी के नाश का श्राप दे दि‍या जि‍ससे ये नगर ध्‍वस्‍त हो गई और इसलिए भानगढ़ आजतक उजाड़ है।

इसलिए भानगढ़ किले में कैद रूहे आज भी रात में चीखती चिल्लाती भटकती हैं। कहने को तो यहाँ महल, बाग-बगिचे कूएं-बावडि़यां महल हवेली सब कुछ है। लेकिन सब के सब खण्डहर। मानो रातो रात य शहर उजड़ गया हो। इस किले से संबंधित अनेकों किस्से कहानीया काफी प्रचलित हैं। स्थानिय लोगो का मानना है कि ये किला शापित है। जिसके कारण लोग डरे रहते है। ये लोगों की कल्पना मात्र है या फिर हकीकत ? इसका पता तो आजतक नहीं चल पाया है। क्या भानगढ़ वाकई में भुतहा किला है ? क्या भानगढ़ में एक रात गुजारने के बाद इसके कई राज़ और भुतहा कहानियों की सच्चाई का पता लगाया जा सकता है ? क्या ये महज एक अन्धविश्वास है ?

लेकिन खुद आर्कियोंलाजिकल सर्वे आफ इंडिया की टीम की सख्त हिदायत है की सूर्यास्त के बाद यहाँ कोई भी नुमाइंदा रुक नहीं सकता। ASAI का लगाया हुआ ये बोर्ड और भानगढ़ से जुडी ये कहानिया सच ही लगती है। आखिर क्या है इस भुतहा किले का रहस्य जो लोगों के लिए भय का कारण बना हुआ है। ये तो अतीत के पन्नो को वो राज़ है जो अब हमेशा के लिए किसी किताब में बंद होकर रह गया है और ये राज़ हमेशा एक राज़ ही रहेगा।

 

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