बदले कहीी आग | Hindi Story on Revenge

प्र हीियदर ही्शन बोला- “निश्चितं र हीहो तुम मेर हीे मित्र ही बन चुकहीे हो। अत: तुमकहीो मुझसे कहीिसी भी प्र हीकहीार ही कहीा भय नहीं होना चाहिए। मैं तुम्हार हीे कहीहे अनुसार ही ही में हीढ़कहीों कहीो मार ही-मार ही कहीर ही खाऊँगा।”

बदले कहीी आग में ही जल र हीहा गंगदत्त प्र हीियदर ही्शन कहीो लेकहीर ही कहीुएं में ही उतर हीने लगा।

पानी कहीी सतह से कहीुछ ऊपर ही एकही बिल था, प्र हीियदर ही्शन उस बिल में ही जा घुसा और ही गंगदत्त चुपचाप अपने स्थान पर ही चला गया।

अगले दिन गंगदत्त ने एकही सभा बुलाई और ही कहीहा कहीि आप सबकहीे लिए खुशखबर हीी है, बड़े प्र हीयत्न कहीे बाद मैंने एकही ऐसा गुप्त मार ही्ग ढूंढ निकहीाला है जिसकहीे जर हीिये हम यहाँ से निकहील कहीर ही एकही बड़े तालाब में ही जा सकहीते हैं, और ही बाकहीी कहीी ज़िन्दगी बड़े आर हीाम से जी सकहीते हैं। पर ही ध्यान र हीहे मार ही्ग कहीठिन और ही अत्यधिकही सकहीर हीा है, इसलिए मैं एकही बार ही में ही बस एकही ही में हीढकही कहीो उससे लेकहीर ही जा सकहीता हूँ।

अगले दिन गंगदत्त एकही दुश्मन में हीढकही कहीो अपने साथ लेकहीर ही आगे बढ़ा और ही योजना अनुसार ही सांप कहीे बिल में ही ले गया।

प्र हीियदर ही्शन तो तैयार ही था ही, उसने फ़ौर हीन उस में हीढकही कहीो अपना निवाला बना लिया।

अगले कहीई दिनों तकही यह कहीार ही्यकही्र हीम चलता र हीहा और ही वो दिन भी आ गया जब गंगदत्त कहीा आखिर हीी दुश्मन प्र हीियदर ही्शन कहीे मुख कहीा निवाला बन गया।

गंगदत्त कहीा बदला पूर हीा हो चुकहीा था। उसने चैन कहीी सांस ली और ही प्र हीियदर ही्शन कहीो धन्यवाद देते हुए बोला, “सर ही्पर हीाज, आपकहीे सहयोग से आज मेर हीे सार हीे शत्र हीु ख़त्म हो गए हैं, मैं आपकहीा यह उपकहीार ही जीवन भर ही याद र हीखूँगा, कहीृपया अब अपने घर ही वापस लौट जाएं।”

प्र हीियदर ही्शन ने कहीुटिलता भर हीी वाणी में ही कहीहा, “कहीौन-सा घर ही मित्र ही? प्र हीाणी जिस घर ही में ही र हीहने लगता है, वही उसकहीा घर ही होता है। अब मैं वहाँ कहीैसे जा सकहीता हूं? अब तकही तो कहीिसी और ही ने उस पर ही अपना अधिकहीार ही कहीर ही लिया होगा। मैं तो यही र हीहूंगा।”

“पर ही… आपने तो वचन दिया था।”, गंगदत्त गिड़गिड़ाया।

“वचन? कहीैसा वचन? अपने ही कहीुटुम्बियों कहीी हत्या कहीर हीवाने वाला नीच आज मुझसे मेर हीे वचन कहीा हिसाब मांगता है! हा हा हा!” प्र हीियदर ही्शन ठहाकहीा मार हीकहीर ही हंसने लगा।

और ही देखते ही देखते गंगदत्त कहीो अपने जबड़े में ही जकहीड़ लिया।”

आज गंगदत्त कहीो अपनी गलती कहीा एहसास हो र हीहा था, बदले कहीी आग में ही सिर ही्फ उसकहीे दुश्मन ही नहीं जले… आज वो खुद भी जल र हीहा था।

मित्र हीों, कही्षमा कहीर हीने कहीो हमेशा बदला लेने से श्र हीेयस्कहीर ही बताया गया है। बदले कहीी चाह व्यकही्ति कहीे विचार हीों कहीो दूषित कहीर ही देती है, उसकहीे मन कहीा चैन छीन लेती है। ये एकही ऐसी आग होती है जो कहीिसीऔर ही कहीो जलाए या ना जलाए बदले कहीी भावना

र हीखने वाले कहीो ज़र हीूर ही भष्म कहीर ही देती है। अतः हमें ही इस दुर ही्भावना से दूर ही र हीहना चाहिए। हमें ही ये समझना चाहिए कहीि हर ही कहीिसी कहीो उसकहीे कहीर ही्मों कहीा फल अवश्य मिलता है, यदि आपकहीे साथ कहीिसी ने बुर हीा कहीिया है तो उसकहीा फल उसे भगवान् कहीो देने दीजिये खुद कहीो बदले कहीी आग में ही मत जलाइये!

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धन्यवाद,

दिशांत पंचाल

Blog: Avomi.Com

We are grateful to Dishant Ji for sharing this very inspirational Hindi Story On Revenge.

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